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गन्ना, चीनी और एथेनॉल उत्पादन में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर: मुख्यमंत्री

Yogi Adityanath

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि गन्ना, चीनी और एथेनॉल उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। लखनऊ में आयोजित एक निजी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले किसानों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलती थीं, जिसके कारण उन्हें गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता था। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच प्रदेश की 29 चीनी मिलें बंद हो गईं या बेच दी गईं, जबकि उनकी जमीनों का मूल्य सैकड़ों करोड़ रुपये था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से अब तक उनकी सरकार ने किसानों के खातों में 3.23 लाख करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना मूल्य भुगतान किया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 122 चीनी मिलों का संचालन किया जा रहा है, जिससे गन्ना किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा मिल रही है।

नौ वर्षों में सिंचाई सुविधाओं का हुआ विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश में 24 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि वर्षों से लंबित बाणसागर परियोजना को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत पूरा कराया गया, जिससे लगभग ढाई लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ मिला।

उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र की अर्जुन सहायक परियोजना भी लंबे समय से अधूरी थी, जिसे उनकी सरकार ने पूरा कराया। इसके साथ ही सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसकी स्वीकृति सत्तर के दशक में मिली थी और वर्ष 1977 में आधारशिला रखी गई थी, लेकिन यह कई दशकों तक अधूरी रही।

निवेश प्रस्तावों से बदली प्रदेश की तस्वीर

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि प्रदेश में सुरक्षा और बेहतर कानून व्यवस्था का वातावरण नहीं होता तो बड़े निवेशक उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आगे नहीं आते। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में निवेशक सम्मेलन की शुरुआत की गई और उसके लिए नई नीतियां तैयार की गईं। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश को अब तक 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

एक जिला-एक उत्पाद योजना से बढ़ा निर्यात

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए “एक जिला-एक उत्पाद” योजना के तहत विशेष प्रयास किए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 75 जिलों के 79 उत्पादों को भौगोलिक पहचान का दर्जा मिल चुका है। उन्होंने कहा कि इस योजना के अंतर्गत वर्तमान में 96 लाख सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग इकाइयां कार्य कर रही हैं, जिनसे लगभग सवा तीन करोड़ युवाओं को रोजगार मिला है। मुख्यमंत्री के अनुसार, उत्तर प्रदेश अब दो लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के उत्पादों का निर्यात कर रहा है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है।

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