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फलीदार फसलों में बढ़ेगी पैदावार: ICAR-IIVR का नया लिक्विड फॉर्मुलेशन तैयार

वाराणसी: भारत में बड़े पैमाने पर किसान फलीदार सब्जियों और दलहन फसलों की खेती करते हैं, लेकिन कई बार इनमें सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे- आयरन और मैंगनीज की कमी देखी जाती है। इस समस्या का समाधान करने के लिए आईसीएआर-आईआईवीआर, वाराणसी के वैज्ञानिकों ने एक विशेष लिक्विड फॉर्मुलेशन तैयार किया है, जिसका नाम ‘काशी सूक्ष्म शक्ति प्लस’ रखा गया है। यह फॉर्मुलेशन न केवल फलीदार फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि उनकी पोषण गुणवत्ता में भी सुधार करेगा।

वर्मीवॉश का भी करता है काम

‘काशी सूक्ष्म शक्ति प्लस’ विशेष रूप से लोबिया और सोयाबीन जैसी फसलों में आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व बढ़ाने के साथ, उनकी उत्पादकता को भी बढ़ाता है। इसके अलावा, यह वर्मीवॉश के रूप में भी प्रभावी रूप से कार्य करता है। ICAR-IIVR के वैज्ञानिकों ने किसानों के खेतों में इसका परीक्षण किया, जिसमें इसे अत्यधिक प्रभावी पाया गया।

20-25 प्रतिशत बढ़ी उत्पादकता

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के कैलहट निवासी प्रगतिशील किसान नागेश कुमार सिंह के खेत में लोबिया और सोयाबीन की फसलों पर ‘काशी सूक्ष्म शक्ति प्लस’ का उपयोग किया गया। साल 2024 में उन्होंने 3 बिस्वा जमीन पर लोबिया और 1 बिस्वा जमीन पर सोयाबीन की खेती में इस लिक्विड फॉर्मुलेशन का इस्तेमाल किया। इसके परिणामस्वरूप उनकी फसल की उत्पादकता में 20-25 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई और उन्हें अतिरिक्त उपज की तुड़ाई करने का भी अवसर मिला।

लोबिया की फसल से 10 हजार रुपये का मुनाफा

नागेश कुमार सिंह ने बताया कि उन्हें लोबिया की फसल से 10,000 रुपये का सीधा लाभ हुआ। वहीं, उन्होंने सोयाबीन की उपज का उपयोग अपने परिवार के उपभोग के लिए किया। वे इस तकनीकी नवाचार से पूरी तरह संतुष्ट हैं और आगे भी ICAR-IIVR के साथ जुड़कर नई कृषि तकनीकों को अपनाने की इच्छा रखते हैं।

अन्य किसान भी उठा सकते हैं लाभ

किसान नागेश कुमार सिंह की सफलता यह दर्शाती है कि अन्य किसान भी ‘काशी सूक्ष्म शक्ति प्लस’ का उपयोग कर अपनी फसलों की उत्पादकता और पोषण गुणवत्ता में सुधार कर सकते हैं। यह तकनीक किसानों को न केवल अधिक उपज प्राप्त करने में मदद करेगी, बल्कि उनके आर्थिक स्तर को भी सुदृढ़ करेगी।

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