नई दिल्ली: हरियाणा और राजस्थान के बीच तीन दशकों से चले आ रहे यमुना जल बंटवारे के विवाद को लेकर बड़ी सहमति बन गई है। लंबे समय से अटकी इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए दोनों राज्यों ने साझा समाधान पर सहमति जताई है। इस समझौते को औपचारिक रूप देने के लिए सोमवार को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी रहेगी।
दिल्ली बैठक में बनी अंतिम सहमति
इससे पहले नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित हुई। इसमें राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भाग लिया। बैठक में जल बंटवारे से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के बाद दोनों राज्यों ने आपसी सहमति से विवाद खत्म करने की योजना को मंजूरी दी।
1994 समझौते के क्रियान्वयन पर था विवाद
हरियाणा और राजस्थान के बीच यह विवाद वर्ष 1994 के यमुना जल समझौते के क्रियान्वयन को लेकर था। उस समय मॉनसून में मिलने वाले अतिरिक्त पानी में राजस्थान की हिस्सेदारी तय की गई थी, लेकिन तकनीकी और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका।
शेखावाटी क्षेत्र को मिलेगी राहत
इस देरी का सबसे अधिक असर राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के चूरू, झुंझुनूं और सीकर जिलों पर पड़ा, जहां लंबे समय से पानी की कमी बनी हुई है। नए समझौते के तहत हथिनीकुंड बैराज से पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने की योजना को गति मिलेगी, जिससे पेयजल और सिंचाई की स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है।
जल संकट से राहत की उम्मीद
यदि यह योजना तय समय पर लागू होती है, तो जल संकट से जूझ रहे इलाकों को बड़ी राहत मिल सकती है। इस समझौते को क्षेत्रीय जल प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में दोनों राज्यों के बीच सहयोग और मजबूत होने की संभावना है।
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