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बिहार सरकार की नई योजना से बंजर जमीन बन सकती है कमाई का जरिया, मछली पालन को मिलेगा बढ़ावा

पटना: बिहार के किसान अब अपनी बेकार पड़ी बंजर जमीन से भी अच्छी कमाई कर सकते हैं। राज्य सरकार ने ऐसी जमीनों को आय का स्रोत बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री चौर विकास योजना की शुरुआत की है। यह योजना ‘सात निश्चय-2’ कार्यक्रम के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए शुरू की गई है, जिसका मकसद मछली पालन को बढ़ावा देकर किसानों की आमदनी को दोगुना करना है।

अक्सर देखा जाता है कि किसान कठिन या अनुपजाऊ जमीन को छोड़ देते हैं, लेकिन अब यही जमीन किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। इस योजना के तहत सरकार किसानों को तालाब खुदवाने के लिए आर्थिक सहायता दे रही है ताकि वे मछली पालन शुरू कर सकें।

मुख्यमंत्री चौर विकास योजना का दायरा केवल मछली पालन तक सीमित नहीं है। सरकार इन क्षेत्रों को इंटीग्रेटेड एक्वाकल्चर यानी समेकित जलकृषि के रूप में विकसित करना चाहती है, जहां एक साथ मछली पालन, बागवानी, कृषि व अन्य संबंधित गतिविधियां की जा सकें। इससे ना केवल भूमि का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि कृषि उत्पादन और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।

कैसे करें आवेदन?

इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसान fisheries.bihar.gov.in पर जाकर 31 अगस्त 2025 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन से पहले संबंधित फिशरीज या कृषि विभाग से संपर्क करना आवश्यक है। आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेजों में आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, पासपोर्ट फोटो और ज़मीन से जुड़े प्रमाण-पत्र शामिल हैं।

योजना के तहत तीन मॉडल उपलब्ध हैं:

2 तालाब (1 हेक्टेयर में): लागत 8.88 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर, 4 तालाब (1 हेक्टेयर में): लागत 7.32 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर और 1 तालाब + भूमि विकास (1 हेक्टेयर में): लागत 9.60 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर।

    सब्सिडी की व्यवस्था

    योजना के अंतर्गत किसानों को 70% तक की सब्सिडी दी जा रही है। सामान्य वर्ग को 50%, जबकि अनुसूचित जाति, जनजाति और अत्यंत पिछड़ा वर्ग को 70% तक का अनुदान मिलेगा। वहीं उद्यमियों को 40% सब्सिडी का प्रावधान है।

    उद्यमियों के लिए शर्तें

    यदि कोई उद्यमी इस योजना में निवेश करना चाहता है, तो उसके पास पिछले तीन वर्षों का ऑडिट और आयकर रिटर्न, जीएसटी नंबर, मालिकाना हक या लीज अनुबंध, और मत्स्य पालन से संबंधित अनुभव या प्रशिक्षण होना अनिवार्य होगा। ऐसे पात्र लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    मछली पालन: बनता जा रहा है लाभकारी व्यवसाय

    मछली पालन अब सिर्फ एक पूरक व्यवसाय नहीं, बल्कि पूरे वर्ष कमाई देने वाला एक मजबूत विकल्प बनता जा रहा है। बाजार में ताजा मछली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह योजना न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि बंजर भूमि के उपयोग और ग्रामीण रोजगार सृजन में भी सहायक साबित हो सकती है। सरकार की यह पहल उन किसानों के लिए बड़ी राहत है जो अपनी जमीन को अनुपयोगी मान कर छोड़ देते थे। अब वही जमीन मुनाफे का साधन बन सकती है।

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