नई दिल्ली: बरसात के मौसम में हरियाली चारों तरफ फैली होती है – खेतों में, मैदानों में और जंगलों तक में हरा चारा भरपूर नजर आता है। लेकिन इसके बावजूद इस मौसम में पशुपालकों को चारे की सबसे ज्यादा समस्या होती है। वजह है कि इस मौसम में मिलने वाला हरा चारा सीधे तौर पर पशुओं को नहीं खिलाया जा सकता, क्योंकि उसमें अत्यधिक नमी होती है, जो पशुओं की सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकती है। यही कारण है कि एनिमल और फोडर एक्सपर्ट बरसात के दिनों में हरा चारा स्टोर करने और साइलेज तैयार करने की सलाह देते हैं। साइलेज एक ऐसी तकनीक है, जिससे हरे चारे को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और वह पोषक तत्वों से भरपूर बना रहता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर किसान बरसात के पहले ही कुछ जरूरी सावधानियां और तकनीकें अपना लें तो उनके दुधारू पशु पूरे मौसम भरपेट, पोषक और सुरक्षित हरा चारा खा सकते हैं।
कौन सी तीन फसलें हैं साइलेज के लिए बेहतर?
विशेषज्ञों के अनुसार बरसीम, ओट और चरी तीन ऐसी चारा फसलें हैं, जिनके तने पतले होते हैं और ये जल्दी सूख जाती हैं। इनका साइलेज बनाना आसान होता है और इनमें फंगस लगने का खतरा कम होता है। लेकिन स्टोर करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि स्टॉक की मात्रा इतनी होनी चाहिए कि वह नई फसल आने तक पूरा खर्च हो जाए। ज़्यादा स्टोर करने पर चारा खराब हो सकता है।
हरा चारा स्टोर करने का सही तरीका क्या है?
चारे को स्टोर करने के लिए हमेशा पतले तनों वाली फसलें चुनी जानी चाहिए, क्योंकि मोटे तने वाले चारे को सुखने में समय लगता है और उनमें जल्दी फफूंदी या फंगस लगने की आशंका बढ़ जाती है। एक्सपर्ट सुझाव देते हैं कि चारे को पकने से कुछ दिन पहले ही काट लेना चाहिए और फिर उसे धूप में सुखाने के लिए रखा जाए। लेकिन गलती से भी चारे को जमीन पर बिछाकर न सुखाएं, क्योंकि इससे उस पर मिट्टी चिपकने और सड़ने का खतरा रहता है। बेहतर यह है कि चारे को जाली या लकड़ी के बने मचानों पर सुखाया जाए या फिर उसे रस्सी से लटकाकर भी सुखाया जा सकता है। चारे में जब 15 से 18 प्रतिशत नमी रह जाए और उसका तना हाथ से तोड़ा जा सके, तभी उसे स्टोर किया जाए। अगर चारे में नमी ज्यादा रह जाती है और उसे स्टोर कर दिया गया तो वह खराब हो सकता है। और अगर इस खराब चारे को पशु खा ले तो गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
फसलों की भरमार के बावजूद सावधानी ज़रूरी
बरसात के मौसम में चारे की फसलों की भरमार रहती है, लेकिन सावधानी और तकनीक के अभाव में किसान इस संसाधन का पूरा लाभ नहीं उठा पाते। इसलिए समय रहते सही चारे का चुनाव, सुखाने की विधि और स्टोरिंग तकनीक अपनाकर ही बरसात में पशुओं के पोषण की कमी से बचा जा सकता है। इस बरसात अगर आपने सही तरीका अपनाया तो न केवल आपके पशु स्वस्थ रहेंगे, बल्कि दूध उत्पादन में भी गिरावट नहीं आएगी। यही नहीं, हरे चारे का सही स्टोरिंग भविष्य में होने वाले चारे संकट से भी पशुपालकों को बचा सकता है।

