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इन विशेषताओं की वजह से श्वेत कपिला गाय है खास

श्वेत कपिला गाय, जिसे गौंठी या गावठी धावी के नाम से भी जाना जाता है। इन गायों के दूध में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, जिनमें पाचन प्रणाली को स्वस्थ रखने में मदद करने वाले पोषक तत्व शामिल हैं। इस नस्ल के मवेशियों का दूध न्यूनतम 350 से अधिकतम 650 लीटर तक होता है। गोवा के किसान और बुजुर्ग लोग मानते हैं कि श्वेत कपिला गाय के दूध में औषधीय गुण होते हैं और इसलिए यह गाय उनके लिए बहुत मूल्यवान होती है।

इन गायों का वजन औसतन 250-300 किलोग्राम होता है और वे दूध के मामले में अद्वितीय हैं। इस नस्ल के मवेशियों के बारे में विशेषज्ञों का मानना है कि इनके द्वारा प्रदान किए जाने वाले दूध में औषधीय गुण होने के कारण ये गौशालाओं में अधिक पसंद की जाती हैं। इस नस्ल की गायें ज्यादातर गोवा के उत्तर और दक्षिण जिलों में पाई जाती हैं। यह गाय आकार में मध्यम से छोटी होती है। जैसा कि नाम से पता चलता है, नाक की नोक से पूंछ की नोक तक यह पूरी तरह सफेद होती है। इसकी पलकें, भीतरी कान और पूंछ भी सफेद होती है।

इस नस्ल का सिर छोटा और सीधा होता है, जिसके कारण यह छोटा और नुकीला होता है। सींगों का आकार भी छोटा होता है, सींग थोड़े उभरे हुए और बाहर की ओर निकले होते हैं। कभी-कभी सीधे बाहर या सीधे ऊपर की ओर तिरछे भी होते हैं। गोवा में, इस नस्ल के अधिकांश मवेशियों को विभिन्न गौशालाओं में रखा जाता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, श्वेत कपिला गाय को कुछ बीमारियों की आशंका हो सकती है, जैसे कि पाचन प्रणाली की बीमारियां, सादी बदहजमी, तेजाबी बदहजमी, खारी बदहजमी, और अन्य पेट बीमारियां। इसके अलावा, इन गायों को कुछ और रोगों की आशंका भी हो सकती है, जैसे कि एंथ्रैक्स, अनाप्लाजमोसिस, अनीमिया इत्यादि।

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