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गेहूं की किस्म HD 3226 की बढ़ी मांग, मिल रही है बम्पर पैदावार

Wheat variety HD 3226

नई दिल्ली: उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में गेहूं की किस्म HD 3226 को व्यावसायिक खेती के लिए आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। इस क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान (कोटा और उदयपुर संभाग को छोड़कर), पश्चिमी यूपी (झांसी संभाग को छोड़कर), जम्मू-कश्मीर के जम्मू और कठुआ जिले, हिमाचल प्रदेश का ऊना जिला, पांवटा घाटी तथा उत्तराखंड का तराई क्षेत्र शामिल है। विशेषज्ञों का दावा है कि यह किस्म सिंचित परिस्थितियों तथा समय पर बुवाई में रिकॉर्डतोड़ उत्पादन देने में सक्षम है और कई प्रमुख रोगों से भी पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती है।

रोगों के प्रति मजबूत प्रतिरोध क्षमता

खेती वैज्ञानिकों के अनुसार HD 3226 गेहूं की उन चुनिंदा किस्मों में से है, जो तीनों प्रकार के रतुआ—पीला, भूरा और काला—के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है। इसके साथ ही यह करनाल बंट, चूर्णिल फफूंद, लूज स्मट और फुट रॉट जैसी बीमारियों से भी प्रभावी सुरक्षा प्रदान करती है। रोगों से सुरक्षित होने के कारण किसान इसे कम लागत में और अधिक स्थिर पैदावार के लिए पसंद कर रहे हैं।

उपज में बन रहा नया रिकॉर्ड

HD 3226 की औसत उपज 57.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है, जबकि इसकी अधिकतम पैदावार क्षमता 79.60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी स्थिरता, उच्च उत्पादकता और जलवायु अनुकूलता इसे किसानों की पहली पसंद बना रही है।

अनाज की गुणवत्ता बेहतर, प्रोटीन भी अधिक

इस किस्म की गुणवत्ता भी उत्कृष्ट पाई गई है। इसमें औसतन 12.8% प्रोटीन पाया जाता है, जो इसे पोषण के दृष्टिकोण से भी श्रेष्ठ बनाता है। इसमें ग्लूटेन की मात्रा कम और सेडिमेंटेशन वैल्यू उच्च होती है, जिससे ब्रेड और बेकरी उत्पादों की क्वालिटी बेहतर बनती है। विशेषज्ञों के अनुसार इस किस्म का ग्लू-1 स्कोर 10 होना इसे उच्च गुणवत्ता वाली ब्रेड के लिए सर्वश्रेष्ठ श्रेणी में रखता है। इसके साथ ही इसमें 36.8 ppm जिंक मौजूद होता है, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए एक अतिरिक्त लाभ है।

खेती पद्धति और बुवाई की सलाह

HD 3226 की खेती सिंचित और समय पर बुवाई की परिस्थितियों में सबसे अधिक सफल रहती है। बुवाई के लिए 100 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की मात्रा उपयुक्त मानी गई है। बुवाई का आदर्श समय 5 से 25 नवंबर के बीच है। फसल प्रबंधन में संतुलित उर्वरक का विशेष महत्व है। इसमें नाइट्रोजन 150 किग्रा, फास्फोरस 80 किग्रा और पोटाश 60 किग्रा प्रति हेक्टेयर देने की सलाह दी गई है। फास्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा तथा नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा बुवाई के समय देनी चाहिए, जबकि शेष नाइट्रोजन पहली और दूसरी सिंचाई के बाद समान रूप से दी जाए।

सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण का शेड्यूल

पहली सिंचाई बुवाई के लगभग 21 दिन बाद करनी चाहिए। इसके बाद फसल की आवश्यकता के अनुसार सिंचाई की जाए। खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 27–35 दिन बाद कुल 40 ग्राम प्रति हेक्टेयर तथा 400 ग्राम प्रति हेक्टेयर की सिफारिश की गई है, जिससे फसल पर किसी भी तरह का खरपतवार दबाव न बने।

उपज बढ़ाने के लिए विशेषज्ञों की विशेष टिप्स

अधिकतम उत्पादन प्राप्त करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि HD 3226 की बुवाई अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में करनी चाहिए। नाइट्रोजन प्रबंधन पर खास ध्यान देते हुए फसल पर दो बार दवा का छिड़काव करने की भी सिफारिश की गई है। इसके लिए क्लोरमेक्वाट क्लोराइड (लिहोसिन) 0.2% और टेबुकोनाजोल (फोलिकर 430 SC) 0.1% का स्प्रे पहली गांठ निकलने पर और ऊपरी पत्तियों पर किया जाना चाहिए।

किसानों में बढ़ रही लोकप्रियता, बाजार में मजबूत पकड़

बेहतर उपज, उत्कृष्ट अनाज गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और बदलते मौसम में स्थिर प्रदर्शन के कारण HD 3226 किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह किस्म उत्तर भारत की प्रमुख गेहूं वैरायटी बन सकती है।

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