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गेहूं निर्यात को मंजूरी, 25 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त भेजेगा भारत

Wheat Exports

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने गेहूं निर्यात को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए 25 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त निर्यात को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक और बाजार की स्थिति की समीक्षा के बाद लिया गया है, जिसका उद्देश्य किसानों को बेहतर कीमत दिलाना और घरेलू बाजार में संतुलन बनाए रखना है।

किसानों को मिलेगा बेहतर दाम

रबी सीजन 2026 में गेहूं की बुवाई का रकबा बढ़कर लगभग 334.17 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। यह वृद्धि किसानों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है, जिसका मुख्य कारण न्यूनतम समर्थन मूल्य और मजबूत खरीद व्यवस्था है। सरकार के इस फैसले से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।

उत्पादन और निर्यात में बढ़ोतरी

दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार वर्ष 2025-26 में गेहूं का उत्पादन 1202 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। पर्याप्त उत्पादन और स्टॉक को देखते हुए सरकार ने निर्यात की अनुमति दी है। इससे पहले भी सरकार चरणबद्ध तरीके से गेहूं और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात को मंजूरी दे चुकी है, जिसके बाद कुल निर्यात अनुमति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

बाजार में आएगा संतुलन

अतिरिक्त निर्यात से बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा और स्टॉक प्रबंधन बेहतर होगा। इससे किसानों को फसल के समय कम दाम पर बेचने की मजबूरी से राहत मिलेगी और बाजार में कीमतों का संतुलन बना रहेगा।

खाद्य सुरक्षा पर नहीं पड़ेगा असर

सरकार का कहना है कि इस निर्णय से देश की खाद्य सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पर्याप्त भंडारण और उत्पादन को ध्यान में रखते हुए ही यह कदम उठाया गया है, ताकि घरेलू जरूरतों और निर्यात के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके। यह फैसला किसानों की आय बढ़ाने, बाजार को स्थिर रखने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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