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गेहूं निर्यात को हरी झंडी, 25 लाख टन गेहूं विदेश भेजने की मंजूरी

Wheat export gehun mandi

नई दिल्ली: देश के गेहूं किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में गेहूं की गिरती कीमतों को स्थिर करने और किसानों को बेहतर रिटर्न दिलाने के उद्देश्य से 25 लाख मीट्रिक टन (LMT) गेहूं और 5 LMT गेहूं निर्यात को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में गेहूं का पर्याप्त भंडारण मौजूद है और कीमतें भी नियंत्रण में हैं। चालू रबी सीजन में रिकॉर्ड स्तर पर बुवाई हुई है और इस बार रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान लगाया जा रहा है। सरकार के अनुसार, इस फैसले से घरेलू जरूरतों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा, बल्कि किसानों को बेहतर बाजार मिलने में मदद मिलेगी।

निजी कंपनियों के पास 32 लाख टन ज्यादा स्टॉक

सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वर्ष 2025-26 के दौरान निजी कंपनियों के पास लगभग 75 लाख मीट्रिक टन गेहूं स्टॉक में रहेगा, जो पिछले साल की तुलना में करीब 32 लाख मीट्रिक टन अधिक है। यह बढ़ोतरी देश में मजबूत सप्लाई स्थिति को दर्शाती है। साथ ही अनुमान है कि 1 अप्रैल 2026 तक Food Corporation of India (FCI) के सेंट्रल पूल में गेहूं की कुल उपलब्धता लगभग 182 LMT रहेगी। ऐसे में सीमित मात्रा में निर्यात की अनुमति से घरेलू आपूर्ति पर दबाव नहीं पड़ेगा।

बाजार में मांग को मिलेगा सहारा

विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल खुले बाजार में गेहूं के भाव दबाव में हैं, क्योंकि उपलब्धता जरूरत से अधिक बनी हुई है। ऐसे में निर्यात की मंजूरी से बाजार में मांग बढ़ेगी और कीमतों को सहारा मिलेगा। इससे किसानों को अपनी फसल बेहतर दाम पर बेचने का अवसर मिलेगा।

चालू रबी सीजन में बढ़ा रकबा, रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद

चालू रबी सीजन में गेहूं की बुवाई का रकबा बढ़ा है। अनुकूल मौसम, बेहतर बीज और सरकारी खरीद व्यवस्था के चलते इस बार भी रिकॉर्ड उत्पादन की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अधिक उत्पादन की स्थिति में निर्यात एक जरूरी विकल्प बन जाता है, ताकि अतिरिक्त आपूर्ति के कारण कीमतों में तेज गिरावट न आए।

चीनी निर्यात को भी मिली मंजूरी

सरकार ने शुगर सीजन 2025-26 के दौरान इच्छुक चीनी मिलों को अतिरिक्त 5 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात करने की अनुमति देने का भी फैसला किया है। इससे पहले इसी सीजन में 15 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात की अनुमति दी जा चुकी थी, लेकिन मिलें अब तक उसका पूरा उपयोग नहीं कर सकीं। जनवरी 2026 के अंत तक सीमित मात्रा में ही चीनी का निर्यात हुआ है और कुछ ही अग्रिम अनुबंध किए गए हैं। ऐसे में नई मात्रा जारी कर निर्यात को गति देने का प्रयास किया गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कोटा इच्छुक मिलों में अनुपात के आधार पर बांटा जाएगा और किसी दूसरी मिल को ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। इस कदम से अतिरिक्त चीनी स्टॉक को खपाने, चीनी मिलों की नकदी स्थिति सुधारने और गन्ना किसानों के भुगतान में तेजी लाने में मदद मिलेगी।

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