नई दिल्ली: गाय-भैंस पालन में पानी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, खासकर गर्मियों के मौसम में। विशेषज्ञों के अनुसार दूध का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा पानी होता है, इसलिए पशुओं को पर्याप्त मात्रा में पानी देना जरूरी है। पानी की कमी होने पर पशु डिहाइड्रेशन और गर्मी के तनाव का शिकार हो जाते हैं, जिससे उनका दूध उत्पादन भी घट जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पशुओं को संतुलित खुराक के साथ भरपूर हरा चारा दिया जाए, तो पानी की कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। एक किलो हरा चारा तीन से चार लीटर पानी की पूर्ति करने में मदद करता है।
गर्मियों में पशुओं की देखभाल के जरूरी उपाय
गर्मी के मौसम में पशुओं को स्वस्थ रखने और उनके शरीर में पानी की कमी न होने देने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है। पशुओं को बार-बार ताजा और ठंडा पानी पिलाना चाहिए। दिन में कम से कम तीन बार उनके शरीर पर पानी का छिड़काव करना लाभदायक होता है। पशुओं को 70 प्रतिशत हरा चारा और 30 प्रतिशत सूखा चारा देना चाहिए। सूखी तूड़ी को खिलाने से पहले भिगोना जरूरी है, ताकि वह आसानी से पच सके।
पशुओं के सामने नमक की ढेली रखना भी फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे उन्हें प्यास लगती है और वे अधिक पानी पीते हैं। सुबह और शाम पशुओं को नहलाना चाहिए और उन्हें हमेशा छायादार स्थान पर रखना चाहिए। जहां पशु बंधे होते हैं, वहां भी समय-समय पर पानी का छिड़काव करना चाहिए।
पानी की कमी के लक्षण और नुकसान
पशुओं में पानी की कमी होने पर कई लक्षण दिखाई देते हैं। जैसे भूख कम लगना, सुस्ती, कमजोरी, गाढ़ा पेशाब, वजन में कमी और त्वचा का सूखना। आंखों का सूख जाना और दूध उत्पादन में कमी भी इसके प्रमुख संकेत हैं। यदि पशु की त्वचा को उंगलियों से उठाने पर वह देर से अपनी जगह पर लौटे, तो यह भी पानी की कमी का संकेत है।
पानी की कमी से पशुओं की पाचन क्षमता प्रभावित होती है और जरूरी पोषक तत्व शरीर से बाहर निकलने लगते हैं। इससे दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। छोटे पशुओं में पेचिस और बड़े पशुओं में दस्त जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए पशुपालकों को चाहिए कि वे गर्मियों में विशेष ध्यान रखते हुए पशुओं को पर्याप्त पानी और संतुलित आहार दें, ताकि उनका स्वास्थ्य और उत्पादन दोनों बेहतर बना रहे।
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