लखनऊ: उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। रबी खरीद वर्ष 2026-27 में गेहूं, चना और मसूर जैसी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की अवधि बढ़ा दी गई है। यह फैसला केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया। बैठक में कृषि, किसान कल्याण और ग्रामीण विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री को किसानों के हित में बड़ा तोहफा देते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद अवधि बढ़ाने का औपचारिक पत्र सौंपा। अब इन फसलों की खरीद चौबीस जून से बढ़ाकर आठ जुलाई दो हजार छब्बीस तक की जाएगी। इस निर्णय से प्रदेश के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और उन्हें अपनी फसल उचित मूल्य पर बेचने का अधिक समय मिल सकेगा।
रबी फसलों की खरीद अवधि में बड़ा बदलाव
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि किसानों को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े, इसलिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद अवधि को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। मौसम, मंडी में भीड़ और तुलाई जैसी समस्याओं के कारण कई बार किसान अपनी फसल समय पर नहीं बेच पाते थे। इस फैसले से ऐसी समस्याओं का समाधान होगा। इस निर्णय से गेहूं, चना और मसूर उत्पादक किसानों को राहत मिलेगी और उन्हें औने-पौने दाम पर अपनी उपज बेचने की मजबूरी से छुटकारा मिलेगा। सरकार का उद्देश्य किसानों की आय को सुरक्षित और स्थिर बनाना है।
कृषि के लिए वैज्ञानिक रोडमैप पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की कृषि व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि देश के कुल गेहूं उत्पादन का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है। उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु हालात, बढ़ते तापमान और गिरते भूजल स्तर को देखते हुए एक वैज्ञानिक और दीर्घकालिक कृषि रोडमैप की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि इस रोडमैप में फसल चक्र, सिंचाई व्यवस्था, जल संरक्षण, बीज सुधार और विपणन व्यवस्था को एक साथ जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य खेती को अधिक उत्पादक और टिकाऊ बनाना है।
जलवायु संकट और फसल योजना पर विशेष ध्यान
बैठक में यह भी बताया गया कि इस वर्ष अल नीनो की स्थिति के कारण बारिश कम होने की संभावना है। ऐसे में सरकार का लक्ष्य है कि खेत खाली न रहें और किसानों की आय प्रभावित न हो। इसके लिए कम पानी में उगने वाली और कम अवधि वाली फसलों को बढ़ावा देने की योजना तैयार की जा रही है। प्रत्येक जिले की जल उपलब्धता, मिट्टी की स्थिति और कृषि पैटर्न के आधार पर वैकल्पिक फसलों की सूची तैयार की जाएगी। कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य कृषि विभाग के माध्यम से किसानों को समय पर सलाह, बीज और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे मौसम की चुनौती का सामना कर सकें।
ग्रामीण विकास में बड़ा कदम
ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के नए चरण के तहत उत्तर प्रदेश के लिए छह लाख अठारह हजार चार सौ बयासी पक्के मकानों की स्वीकृति दी गई है। यह योजना वर्ष दो हजार चौबीस-पच्चीस से दो हजार अट्ठाईस-उनतीस तक लागू होगी और इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आवास की समस्या को समाप्त करना है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है और पात्र परिवारों की पहचान कर ली गई है। अब इन परिवारों को चरणबद्ध तरीके से पक्के मकान उपलब्ध कराए जाएंगे।
किसान मजबूत और गांव समृद्ध का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि किसानों को सशक्त बनाया जाए और गांवों को समृद्ध किया जाए। उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद अवधि बढ़ाने और आवास योजना के विस्तार जैसे निर्णय इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से उत्तर प्रदेश कृषि और ग्रामीण विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनेगा। यह नीतियां आने वाले वर्षों में किसानों, ग्रामीण परिवारों और कृषि अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन लाएंगी।
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