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उत्तर प्रदेश सरकार की ‘गोपालक योजना’ से मिलेगा 9 लाख रुपये तक का लोन, डेयरी फार्मिंग को बढ़ावा देने की बड़ी पहल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और पशुपालन को एक स्थायी व्यवसाय के रूप में विकसित करने के लिए योगी सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। सरकार की महत्वाकांक्षी ‘गोपालक योजना’ के तहत अब पात्र आवेदकों को डेयरी व्यवसाय शुरू करने के लिए 9 लाख रुपये तक का बैंक लोन मिल सकेगा। इस योजना का उद्देश्य गाय, भैंस या बकरी पालन को बढ़ावा देकर न केवल दूध उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देना है। दुग्धशाला विकास अधिकारी डॉ. राम सागर ने जानकारी दी कि ‘गोपालक योजना’ खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। योजना के तहत राज्य के योग्य आवेदक डेयरी फार्मिंग में अपने व्यवसाय की शुरुआत कर सकते हैं, जिसके लिए उन्हें सरकार की ओर से बैंक ऋण दिलाया जाएगा।

इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण शर्तें तय की गई हैं। योजना के अंतर्गत आवेदन करने वाले व्यक्ति की वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही, उसके पास पशुओं के रख-रखाव के लिए पर्याप्त स्थान होना आवश्यक है। यह शर्त इसलिए रखी गई है ताकि जिनके पास जमीन और संसाधन सीमित हैं, उन्हें स्वरोजगार का अवसर मिल सके। योजना में आवेदन करने के लिए कई जरूरी दस्तावेज भी मांगे गए हैं। इनमें आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो, मोबाइल नंबर, बैंक खाता विवरण और परिवार का राशन कार्ड अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। यह दस्तावेजी प्रक्रिया पारदर्शिता और पात्रता सुनिश्चित करने के लिए रखी गई है।

डॉ. राम सागर ने बताया कि इस योजना के लिए इच्छुक लाभार्थी जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। वहां से आवेदन फॉर्म प्राप्त किया जा सकता है और दस्तावेजों के साथ जमा भी किया जा सकता है। इसके बाद आवेदन की जांच कर योग्य पाए गए आवेदकों को स्वीकृति पत्र जारी किया जाएगा, जिसके आधार पर वे अपनी निकटतम बैंक शाखा में जाकर 9 लाख रुपये तक का लोन प्राप्त कर सकेंगे। यह योजना न केवल युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि उत्तर प्रदेश में व्यवस्थित पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को नई ऊंचाई देने का प्रयास भी है। राज्य सरकार का मानना है कि पशुपालन और डेयरी फार्मिंग जैसे व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी रोजगार और आय का बेहतर स्रोत बन सकते हैं। इस योजना के लागू होने से न सिर्फ पशुपालन को औद्योगिक स्वरूप मिलेगा, बल्कि इससे राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी।

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