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उत्तर प्रदेश: केंद्र सरकार के सहयोग से दूध उत्पादकता को किया जाएगा प्रोत्साहित

लखनऊ: प्रदेश में दूध उत्पादन के व्यवसाय से जुड़े लोगों के दिन जल्द ही बदलने वाले हैं। अगर सबकुछ योजना के अनुरूप रहा तो बहुत जल्द दूध के व्यवसाय से जुड़े लोगों की आमदनी में अच्छी खासी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। प्रदेश सरकार इसके लिए केन्द्र के साथ दूध उत्पादन से संबन्धित एक विशेष योजना पर कार्य कर रही है। इसके अनुसार केंद्र सरकार के सहयोग से पूरे प्रदेश में पशुधन सुधार कार्य शुरू किए जाएंगे। यह कार्य तीन स्तरों पर किया जाएगा। प्रदेश सरकार के अनुसार इससे राज्य के डेयरी उद्योग का पूरी तरह से कायाकल्प हो जाएगा।

आपको बता दें कि, न केवल दूध उत्पादन बल्कि देश भर में सबसे अधिक दुधारू पशुओं की संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश का पहला स्थान है। अगर राष्ट्रीय स्तर पर दूध उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश के योगदान की बात करें तो यह 18 प्रतिशत है। राज्य और केंद्र सरकार द्वारा संचालित दूध उत्पादन के प्रोत्साहन से जुड़ी योजना से दूध उत्पादकता में और भी वृद्धि देखने को मिलेगी। इस योजना के तहत प्रदेश के गाय-भैंसों की नस्लों में सुधार किया जाएगा। बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रदेश में ही पौष्टिक चारे का उत्पा दन शुरू किया जाएगा। जहाँ तक बात है पशुओं के स्वास्थ्य की तो इसके लिए भी नए सिरे से विश्वस्तरीय प्रयास शुरू किए जाएंगे। मवेशियों के रोग नियंत्रण के लिए पूरे वर्ष एफएमडी, मेस्टाइटिस और ब्रुसिलोसिस जैसे घातक रोगों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए विशेष रूप से आधुनिक व्यवस्था तैयार की जा रही है।

प्रदेश में दूध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए सबसे पहले गाय की नस्ल सुधार का कार्य शुरू किया जाएगा। फिलहाल राज्य में कृत्रिम गर्भाधान का आँकड़ा मुश्किल से 29 प्रतिशत है। इसे बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसे बढ़ाकर 35 से 40 प्रतिशत तक ले जाया जाएगा। साथ ही एआई की गुणवत्ता में भी सुधार किया जाएगा। गौरतलब है कि दूध की उत्पा दकता में चारे की भी बड़ी भूमिका होती है। इसलिए प्रदेश में एक नई चारा एवं फोर्टीफाइड फीड की नीति तैयार की जा रही है ताकि सूखे की स्थिति में चारे की कोई समस्या न हो।

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