नई दिल्ली: सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि मार्च-अप्रैल 2026 के दौरान देश में यूरिया उत्पादन में किसी प्रकार की गिरावट नहीं आई है। सरकार ने उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें पश्चिम एशिया के तनाव के कारण यूरिया आपूर्ति प्रभावित होने की बात कही जा रही थी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस अवधि में कुल 37 लाख टन यूरिया का उत्पादन हुआ, जो पिछले वर्ष के समान स्तर पर है।
उत्पादन और आयात दोनों रहे मजबूत
सरकार के अनुसार मार्च में 16 लाख टन और अप्रैल में 21 लाख टन यूरिया का उत्पादन किया गया। इस तरह दो महीनों में कुल उत्पादन 37 लाख टन तक पहुंच गया। अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्ष भी इसी अवधि में उत्पादन लगभग इतना ही रहा था। किसी भी संभावित कमी से निपटने के लिए सरकार ने पहले से तैयारी कर ली है। खरीफ मौसम को ध्यान में रखते हुए लगभग 37 लाख टन यूरिया के आयात की व्यवस्था की गई है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निविदाएं भी जारी की गई हैं।
कुल खाद उपलब्धता की स्थिति
मार्च-अप्रैल के दौरान अन्य उर्वरकों का उत्पादन भी संतोषजनक रहा। इस अवधि में देश में कुल घरेलू उर्वरक उत्पादन 62 लाख टन रहा, जिसमें विभिन्न प्रकार के उर्वरक शामिल हैं। इसके अलावा 15 लाख टन उर्वरक का आयात भी किया गया। अधिकारियों के अनुसार घरेलू उत्पादन और आयात को मिलाकर लगभग 78 लाख टन उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा है।
विभिन्न उर्वरकों का उत्पादन
इस अवधि में डी-अमोनियम फॉस्फेट का उत्पादन 4.8 लाख टन, मिश्रित उर्वरकों का 13 लाख टन और सिंगल सुपर फॉस्फेट का 7.4 लाख टन रहा। साथ ही फॉस्फेट आधारित उर्वरकों के लिए 19 लाख टन का अलग से निविदा जारी किया गया है। सरकार कच्चे माल की उपलब्धता की लगातार समीक्षा कर रही है।
खरीफ 2026 के लिए मजबूत तैयारी
सरकार ने बताया कि खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों की स्थिति मजबूत है। कुल अनुमानित आवश्यकता 390 लाख टन है, जिसके मुकाबले अभी 193 लाख टन का भंडार उपलब्ध है। यानी लगभग आधी जरूरत पहले ही पूरी कर ली गई है। वर्तमान में यूरिया का भंडार 73 लाख टन, डीएपी का 23 लाख टन और अन्य उर्वरकों का भी पर्याप्त भंडार मौजूद है। अधिकारियों के मुताबिक यह बेहतर योजना, भंडारण और आपूर्ति व्यवस्था का परिणाम है।
मूल्य में कोई बदलाव नहीं
सरकार ने किसानों को आश्वस्त किया है कि उर्वरकों के अधिकतम खुदरा मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया गया है। किसानों को उर्वरक पहले की तरह निर्धारित दर पर ही मिलते रहेंगे।
आयात पर निर्भरता बनी हुई
भारत उर्वरकों का विश्व में बड़ा उपभोक्ता है और कई उर्वरकों के लिए आयात पर निर्भर है। देश अपनी बड़ी जरूरत आयात के माध्यम से पूरी करता है। साथ ही उर्वरक निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल के लिए भी बाहरी स्रोतों पर निर्भरता बनी हुई है। इसके बावजूद सरकार का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में देश में उर्वरकों की उपलब्धता पूरी तरह सुरक्षित और पर्याप्त है।
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