नई दिल्ली: देश की समुद्री अर्थव्यवस्था में टूना मछली एक बड़ा अवसर बनकर उभर रही है। यह मछली न सिर्फ भारतीय बाजार में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी लोकप्रिय है। खास बात यह है कि भारत के समुद्री इलाकों में इसकी भरपूर उपलब्धता है, खासतौर पर येलोफिन और स्किपजैक प्रजातियों की। इन दोनों की मांग घरेलू और विदेशी बाजारों में लगातार बनी हुई है। भारतीय बाजारों में टूना मछली 150 रुपये किलो से लेकर 400 से 500 रुपये किलो तक बिकती है। लेकिन जब बात एक्सपोर्ट क्वालिटी की आती है तो इसका मूल्य करोड़ों तक पहुंच जाता है। उदाहरण के लिए अटलांटिक ब्लूफिन टूना की कीमत 10 से 12 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। यही कारण है कि केंद्र सरकार टूना मछली के कारोबार को बढ़ावा देने के लिए नई रणनीतियों पर काम कर रही है।
लक्ष्यद्वीप में है भारी मात्रा में टूना, लेकिन ये हैं चुनौतियाँ
फिशरीज एक्सपर्ट के मुताबिक, लक्षद्वीप के समुद्री क्षेत्र में टूना मछली की भारी मात्रा है। लेकिन यह मछली गहरे समुद्र में पाई जाती है, जिसे पकड़ना और किनारे तक फ्रेश अवस्था में लाना एक बड़ी चुनौती है। इसी वजह से टूना का पूरा व्यावसायिक लाभ देश नहीं उठा पा रहा है। सरकार अब इस चुनौती को हल करने के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र को साझेदारी का ऑफर दे रही है।
सिर्फ 25 हजार टन टूना ही हो रही है कैच
गुजरात में हाल ही में हुए इंटरनेशनल फिशरीज कॉन्क्लेव में भी टूना मछली पर विस्तार से चर्चा हुई थी। वर्ल्ड बैंक के सलाहकार डॉ. आर्थर नीलैंड ने बताया कि भारत के स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) में करीब 1.79 लाख टन टूना मछली पाई जाती है, लेकिन हकीकत यह है कि इसका केवल 25 हजार टन ही मछुआरे पकड़ पा रहे हैं।
क्यों पिछड़ रहा है भारत?
डिप्टी डायरेक्टर जनरल (डीडीजी) फिशरीज, जे.के. जैना का कहना है कि भारत की टूना मछली को ठीक से कीमत इसलिए नहीं मिल पाती क्योंकि गहरे समुद्र से लौटने में छह से सात दिन लग जाते हैं और इस दौरान मछली की गुणवत्ता खराब हो जाती है। जबकि मालदीव में यही मछली आठ डॉलर प्रति किलो के भाव से बिकती है। अगर मछुआरों की बोट में कोल्ड स्टोरेज की सुविधा हो, तो भारत भी इस प्रतिस्पर्धा में आगे निकल सकता है।
सेहत के लिए भी फायदेमंद है टूना
टूना मछली सिर्फ स्वाद और एक्सपोर्ट वैल्यू में ही नहीं, सेहत के लिहाज से भी बेहद लाभकारी मानी जाती है। इसमें कैल्शियम, विटामिन-डी, मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं, दिल की सेहत सुधारते हैं और आंखों के लिए भी फायदेमंद होते हैं। कोविड-19 के दौरान इसकी डिमांड इसलिए भी बढ़ी क्योंकि यह इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार साबित हुई।
भविष्य की ओर उम्मीदें
सरकार अब टूना कारोबार में टेक्नोलॉजी, आधुनिक फिशिंग बोट्स और निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत अपनी समुद्री क्षमता का सही उपयोग करे, तो न सिर्फ मछुआरों की आमदनी बढ़ेगी बल्कि देश को एक बड़ा एक्सपोर्ट हब भी बनाया जा सकता है। टूना मछली भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था के लिए “स्वर्ण अवसर” साबित हो सकती है, बशर्ते सही नीतियां, आधुनिक तकनीक और समयबद्ध निवेश सुनिश्चित किए जाएं।

