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मक्के की यह नई किस्म इस फसल की व्यावसायिक खेती को देगी बढ़ावा

लुधियाना: मक्के की खेती  करने वाले किसानों के लिए एक बड़ी खबरी सामने आई है। दरअसल इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मक्का रिसर्च (ICAR-IIMR) लुधियाना ने पहली कम फाइटिक एसिड मक्का की हाइब्रिड किस्म जारी की है। इस किस्म का नाम पीएमएच 1-एलपी है। यह मक्के की एक हाईब्रिड किस्म है। यह किस्म उन किसानों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद साबित होने वाली है, जो मक्के की बड़े पैमाने पर खेती करते हैं।

आईआईएमआर, लुधियाना की तरफ से जारी की गई मक्के की पीएमएच 1-एलपी किस्म को व्यवासायिक खेती के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। यह किस्म पंजाब, हरियाणा व उत्तराखंड के मैदानी इलाकों के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली के किसानों के लिए भी फायदेमंद मानी जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि पीएमएच 1-एलपी में अपने मूल संस्करण पीएमएच 1 के मुकाबले 36% कम फाइटिक एसिड है।

कृषि विशेषज्ञ यह भी बता रहे हैं कि पीएमएच 1-एलपी किस्म की उपज क्षमता 95 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से अधिक है। यह किस्म मेडिस लीफ ब्लाइट, टरसिकम लीफ ब्लाइट और चारकोल रोट जैसे प्रमुख रोगों के लिए मध्यम प्रतिरोध है।

फिलहाल देशभर के किसान सबसे अधिक मक्के की पीएमएच 1 किस्म की बुआई कर रहे हैं। यह किस्म को वर्ष 2007 में पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने विकसित किया था। पीएमएच 1-एलपी को इसी किस्म का उन्नत संस्करण बताया जा रहा है। आईआईएमआर के एक बयान के अनुसार यह मक्के की देश भर में पहली कम फाइटेट हाइब्रिड किस्म है।

बता दें कि मक्के का चारा उद्योग में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। कुक्कुट क्षेत्र ऊर्जा स्रोत के लिए मक्के के दानों पर सबसे अधिक निर्भर रहता है। मक्के के दानों में फाइटिक एसिड प्रमुख पोषण-विरोधी कारकों में से एक है जो लोहे और जस्ता जैसे विभिन्न खनिज तत्वों की जैव-उपलब्धता को प्रभावित करता है।

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