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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में जंगली जानवरों से नुकसान भी होगा शामिल

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को बड़ी राहत देने वाला अहम फैसला लिया है। अब राज्य सरकारें यदि चाहें तो जंगली जानवरों द्वारा फसलों को होने वाले नुकसान को भी बीमा सुरक्षा के दायरे में शामिल कर सकेंगी। हालांकि, इस अतिरिक्त सुविधा को लागू करने के लिए अतिरिक्त प्रीमियम का पूरा खर्च संबंधित राज्य सरकार को वहन करना होगा। इस फैसले से उन राज्यों के किसानों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जहां नीलगाय, जंगली सूअर, हाथी और अन्य वन्य जीवों से फसलों को भारी नुकसान होता है।

जंगली जानवरों से फसल नुकसान पर भी मिलेगा बीमा सुरक्षा का विकल्प

लोकसभा में एक लिखित उत्तर में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के संचालन दिशा-निर्देशों में संशोधन करते हुए राज्यों को जंगली जानवरों से होने वाले फसल नुकसान को अतिरिक्त बीमा सुरक्षा के रूप में अधिसूचित करने की अनुमति दी गई है। यह निर्णय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा विभिन्न राज्य सरकारों के अनुरोध के बाद लिया गया है। उन्होंने बताया कि पहले जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान को योजना में शामिल नहीं किया गया था, क्योंकि इसे रोके जा सकने वाला जोखिम माना जाता था। लेकिन किसानों की बढ़ती समस्याओं और राज्यों की मांग को देखते हुए अब इसे अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में शामिल करने का रास्ता खोल दिया गया है।

बाढ़ से होने वाले नुकसान का प्रावधान पहले से मौजूद

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अधिसूचित सभी फसलों के लिए बाढ़ से होने वाले नुकसान का बीमा प्रावधान पहले से उपलब्ध है। यदि किसी क्षेत्र में बाढ़ के कारण फसल प्रभावित होती है तो किसान योजना के निर्धारित नियमों के अनुसार बीमा दावा कर सकते हैं।

कुछ फसलों के लिए स्थानीय नुकसान पर अलग व्यवस्था

सरकार ने स्पष्ट किया है कि धान, जूट, मेस्ता और गन्ने जैसी अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसलों में स्थानीय स्तर पर होने वाले नुकसान के मामलों में बाढ़ संबंधी यह प्रावधान लागू नहीं होगा। इन फसलों के लिए दावों के निपटान की व्यवस्था योजना के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ही की जाएगी।

वर्ष 2016-17 से लागू है योजना

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना वर्ष 2016-17 से लागू है। यह योजना राज्यों और किसानों दोनों के लिए स्वैच्छिक है। इसके तहत बुवाई से लेकर कटाई के बाद तक प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान के लिए व्यापक बीमा सुरक्षा प्रदान की जाती है। सरकार का मानना है कि जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान को अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में शामिल करने का विकल्प मिलने से राज्यों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी और किसानों को अधिक व्यापक सुरक्षा मिल सकेगी।

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