Site icon Agriculture| Kheti| Krishi| Farm| Farmer| Agriculture| News

देश-दुनिया में मुर्रा भैंस की मांग, दूध उत्पादन में सबसे आगे, ऐसे करें असली की पहचान

हिसार: देश की सबसे अधिक पाली जाने वाली भैंस की नस्ल मुर्रा अब केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में भी लोकप्रिय हो चुकी है। सेंट्रल बफैलो रिसर्च इंस्टीट्यूट (CIRB), हिसार के रिटायर्ड साइंटिस्ट डॉ. सज्जन सिंह ने किसान तक को बताया कि मुर्रा भैंस न सिर्फ अधिक दूध देती है, बल्कि गुणवत्ता के मामले में भी इसका दूध बेहद समृद्ध होता है। यही वजह है कि इसका दूध विदेशों तक एक्सपोर्ट किया जाता है और भारत की कई सरकारी पशुपालन योजनाओं में इस नस्ल को प्रमुखता दी जाती है।

मुर्रा भैंस मूल रूप से हरियाणा और दिल्ली क्षेत्र की है, विशेषकर रोहतक, हिसार, झज्जर, जींद, गुड़गांव और फतेहबाद जिलों को इसका गढ़ माना जाता है। लेकिन आज यह नस्ल चीन, श्रीलंका, मलेशिया, बांग्लादेश, बुल्गारिया, थाईलैंड, नेपाल, इंडोनेशिया, ब्राजील, म्यांमार और वियतनाम जैसे देशों तक में पहुंच चुकी है। इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है इसका दूध देने की क्षमता – पहला बच्चा देने के बाद मुर्रा भैंस रोजाना करीब 12 से 15 लीटर दूध देती है।

मुर्रा भैंस की पहचान कई विशेष शारीरिक गुणों से की जा सकती है। इसका रंग गहरा काला होता है, और सींग छोटे, पीछे और ऊपर की ओर मुड़े हुए होते हैं। इसकी आंखें काली और उभरी हुई होती हैं, जबकि नर भैंसों की आंखें अपेक्षाकृत सिकुड़ी होती हैं। पूंछ की लंबाई लगभग 6 इंच तक होती है और शरीर भारी व पच्चर के आकार का होता है। मादा भैंस की गर्दन लंबी और पतली होती है जबकि नर की गर्दन मोटी और भारी होती है। कान छोटे, पतले और हमेशा सतर्क अवस्था में रहते हैं। मुर्रा मादा की औसतन लंबाई 148 सेमी और ऊंचाई 133 सेमी होती है, जबकि नर की लंबाई 150 सेमी और ऊंचाई 142 सेमी होती है।

वजन की बात करें तो जन्म के समय मादा का वजन करीब 30 किलो और नर का 31.7 किलो होता है। वयस्क होने पर मुर्रा मादा का वजन 350 से 700 किलो और नर का 400 से 800 किलो तक पहुंच सकता है। मुर्रा भैंसों को स्वस्थ रखने और अच्छे दूध उत्पादन के लिए बरसीम, जई, सरसों, बाजरा, ज्वार, क्लस्टर बीन, खली, दलिया और गेहूं-दाल का भूसा जैसे चारे दिए जाते हैं। इनके लिए कच्चे फर्श और पक्की दीवारों वाला हवादार शेड उपयुक्त माना जाता है।

कीमत की बात करें तो सामान्य मुर्रा भैंस 80 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक में बाजार में उपलब्ध होती है। इसके दूध उत्पादन की मात्रा उसकी ब्यांत और दी जाने वाली खुराक पर निर्भर करती है। केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, मुर्रा भैंस अब भारत के लगभग सभी राज्यों में पाली जा रही है। सबसे अधिक संख्या में ये उत्तर प्रदेश, राजस्थान और आंध्र प्रदेश में पाली जाती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि मुर्रा नस्ल का व्यवस्थित पालन न केवल किसानों के लिए एक फायदे का सौदा है, बल्कि देश की डेयरी अर्थव्यवस्था के लिए भी यह बेहद अहम है।

Exit mobile version