पटना: बिहार में इस साल मॉनसून सीजन की बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। राज्यभर में जून के अंत से जुलाई मध्य तक हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी तो है, लेकिन यह वर्षा इतनी पर्याप्त नहीं है कि खरीफ फसलों की बुआई गति पकड़ सके। कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक धान की रोपनी सरकारी लक्ष्य के मुकाबले महज 9 प्रतिशत ही हो पाई है, जबकि मक्का की खेती भी लक्ष्य से काफी पीछे है।
धान की रोपनी महज 3 लाख हेक्टेयर तक सीमित
राज्य में खरीफ सीजन के लिए धान की खेती का लक्ष्य करीब 37 लाख हेक्टेयर निर्धारित किया गया था। लेकिन जुलाई मध्य तक केवल 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही रोपनी हो सकी है। आमतौर पर इस समय तक राज्य में 60 फीसदी से ज्यादा धान की रोपनी पूरी हो जाया करती है, लेकिन इस बार आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। मक्का की खेती का भी यही हाल है। करीब 2.85 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 86 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुआई हो सकी है, जो कुल लक्ष्य का महज 30 फीसदी है।
किसान अब भी आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं
जमीन पर हालात यह हैं कि अधिकांश किसान अब भी बारिश की प्रतीक्षा में बैठे हैं। कैमूर जिले के किसानों ने बताया कि उनके इलाके में धान की रोपाई वही किसान कर पा रहे हैं जिनके पास निजी पंप और सिंचाई के साधन हैं। कर्मनाशा नदी में पानी न होने के कारण लरमा और विश्वकर्मा पंप कैनाल बंद पड़े हैं, जिससे दुर्गावती प्रखंड में खेती बाधित है। पानी का जलस्तर भी चिंता का कारण बनता जा रहा है। पिछले साल जहां जलस्तर 60 फीट था, वहीं अब वह घटकर 80 फीट तक पहुंच गया है, जिससे न केवल खेती बल्कि पेयजल संकट भी गहराने लगा है।
जहां नहरें सक्रिय, वहां हालात बेहतर
हालांकि कुछ इलाके ऐसे भी हैं जहां स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। रोहतास जिले के किसानों का कहना है कि नहरों से सिंचाई की सुविधा वाले क्षेत्रों में धान की रोपाई जारी है। लेकिन इन क्षेत्रों की संख्या सीमित है, और अधिकांश किसान अब भी मानसून की मेहरबानी के इंतजार में हैं। जिन किसानों ने निजी साधनों से धान की रोपनी कर भी ली है, उनके सामने अब फसल को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। जबकि बक्सर, सहरसा और दरभंगा के किसान बताते हैं कि तापमान में वृद्धि के कारण खेतों में पानी की जरूरत सामान्य दिनों से कहीं ज्यादा है। इससे सिंचाई पर लागत बढ़ रही है और फसल पर रोगों का खतरा भी मंडरा रहा है।
बारिश में 54 फीसदी की भारी कमी: मौसम विभाग
मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के वरिष्ठ वैज्ञानिक आशीष कुमार ने बताया कि बिहार में इस वर्ष जून महीने में सामान्य से 36 प्रतिशत कम बारिश हुई। जुलाई मध्य तक बारिश में कुल 54 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले 24 घंटों में दक्षिण बिहार के बांका, नवादा, गया, रोहतास, भागलपुर, औरंगाबाद और कटिहार जिलों में भारी वर्षा हो सकती है, जबकि शेष जिलों में हल्की बारिश की संभावना है। बिहार में मॉनसून की सुस्ती ने न केवल खेती-किसानी पर असर डाला है बल्कि पेयजल संकट की आहट भी दे दी है। यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं होती है, तो राज्य के कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए यह सीजन बेहद मुश्किल भरा साबित हो सकता है। सरकार और किसान, दोनों की निगाहें अब आसमान की ओर लगी हैं।

