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इस मोटे अनाज की खेती को सरकार कर रही है प्रोत्साहित

नई दिल्ली: मोटे अनाज यानी मिलेट्स को भारत में अब श्री अन्न के नाम से भी जाना जाता है। केंद्र सरकार के प्रयासों से अब न केवल हमारे देश में बल्कि पूरे विश्व में मोटे अनाजों को एक बार फिर से महत्व मिलता हुआ सा दिख रहा है। मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष मना रही है। मोटे अनाज में आठ अनाज (बाजरा, ज्वार, रागी, कंगनी, कुटकी, कोदो, सवां और चीना) शामिल हैं। चीना भी एक प्रमुख मोटा अनाज है। इसकी खेती हमारे देश के कई राज्यों में की जाती है। यह अनाज मानव शरीर के लिए काफी गुणकारी है। लोग मोटे अनाज का सेवन अलग-अलग तरीके से करते हैं। यह मोटा अनाज फैट और कोलेस्ट्रॉल फ्री होता है। साथ ही प्रोटीन, फाइबर, विटामिन-बी, आयरन और जिंक समेत कई विटामिन और खनिजों का का एक एक प्रमुख स्रोत भी है। हालांकि इस अनाज से अन्य मोटे अनाजों के मुक़ाबले लोग कम ही परिचित हैं, लेकिन स्वास्थ्य के लिहाज से यह अनाज काफी फायदेमंद है। अब धीरे-धीरे इस अनाज की लोकप्रियता में वृद्धि हो रही है। ऐसे में इस अनाज की खेती भी आने वाले समय में किसानों के लिए बड़े फायदे का सौदा साबित हो सकती है।

चीना को अंग्रेजी में प्रोसो मिलेट्स के नाम से भी जाना जाता है। चीना एक ऐसा मोटा अनाज है, जो पूरी दुनिया में उगाया जाता है। भारत के साथ-साथ यूरोप, चीन और अमेरिका में इससे सूप, दलिया और नूडल्स बनाए जाते हैं। इसकी खेती से अधिक लाभ कमाया जा सकता है। अगर भारत में चीना के सबसे बड़े उत्पादक राज्य की बात करें तो कर्नाटक में सबसे अधिक चीना का उत्पादन होता है। हमारे देश में प्राचीन काल से ही चीना को अपने आहार में शामिल किया गया है। इसे बंजर जमीन, उष्ण स्थिति या बदलते वातावरण में भी आसानी से उगाया जा सकता है। इसे उगाने के लिए अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है, न ही अधिक कीटनाशकों या उर्वरकों पर खर्च करना पड़ता है। इसलिए इसकी खेती में किसानों को मुनाफा होने की संभावना बढ़ जाती है।

चीना में अन्य फसलों की तुलना में अधिक नाइट्रोजन उपयोग की क्षमता होती है। इसका उपयोग मिट्टी के प्रदूषण को रोकने के लिए भी किया जाता है। यह स्वाद में टूटे हुए चावल के समान होती है और इसमें उच्च स्तर का प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, खनिज और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स पाया जाता है। चीना ह्रदय रोग, कैंसर, गठिया रोग, सूजन का खतरा कम करता है और शरीर की इम्यूनिटी को बेहतर बनाता है।

चीना मात्र 60 से 100 दिनों में पक कर तैयार हो जाता है। इस फसल को सूखा क्षेत्र में भी आसानी से लगा सकते हैं। प्रोसो मिलेट यानी कि चीना सूक्ष्म पोषक तत्वों और आवश्यक अमीनो एसिड से भरपूर होता है। इसमें भरपूर पोषक तत्व पाए जाते हैं। इस वजह से यह अनाज पशुओं के चारे के रूप में भी उपयोग में लाया जाता है। इन तमाम वजहों से चीना की खेती में बढ़िया मुनाफे की संभावना दिख रही है। ऐसे में मोटे अनाजों की खेती करने वाले किसान इस फसल की खेती में भी अपना हाथ आजमा सकते हैं।

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