नई दिल्ली: पिछले कुछ सालों में किसानों का रुझान पारंपरिक खेती छोड़कर मॉडर्न फार्मिंग और बागवानी की ओर तेजी से बढ़ा है। फलों की खेती न सिर्फ लंबे समय तक स्थायी आय का जरिया बन रही है, बल्कि बाजार में इनकी अच्छी कीमत मिलने से किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं। मौसमी सब्जियों के साथ-साथ अब कई किसान फलों के बागान लगाने लगे हैं। इसी कड़ी में ताइवानी अमरूद की बागवानी इन दिनों काफी लोकप्रिय हो रही है। इसका स्वाद और आकार देसी अमरूद से बेहतर माना जाता है, इसलिए बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
कब करें ताइवानी अमरूद की बागवानी?
विशेषज्ञों का कहना है कि ताइवानी अमरूद लगाने के लिए मॉनसून और जायद सीजन सबसे अच्छा होता है। इस समय पौधों को पर्याप्त नमी मिलती है और सिंचाई की समस्या कम हो जाती है। इसके अलावा फरवरी-मार्च के बीच भी इसकी रोपाई की जा सकती है। इस साल 15 अक्टूबर तक किसान इसकी खेती शुरू कर सकते हैं।
ताइवानी अमरूद लगाने का तरीका
ताइवानी अमरूद की बागवानी के लिए दोमट और बलुई मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी का पीएच मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए और उसमें जलधारण क्षमता अच्छी होनी चाहिए।
- पौधों की रोपाई से पहले खेत को समतल करके 2×2×2 फीट गड्ढे तैयार करें।
- हर गड्ढे में 20-25 किलो गोबर की सड़ी खाद और 1 किलो नीम की खली डालें ताकि मिट्टी उर्वरक और रोगमुक्त हो सके।
- सामान्य दूरी 5×5 मीटर रखने पर एक एकड़ में 150-160 पौधे लगाए जा सकते हैं।
- नर्सरी से 6–12 महीने के स्वस्थ पौधे लाकर रोपाई करनी चाहिए।
देखभाल और सिंचाई
ताइवानी अमरूद की फसल तेजी से बढ़ती है, लेकिन इसकी देखभाल बेहद जरूरी होती है।
- शुरुआती 3 महीने पौधों में नियमित नमी बनाए रखें और सप्ताह में 3-4 बार सिंचाई करें।
- पौधों को साल में दो बार नाइट्रोजन 250-300 ग्राम, फॉस्फोरस 200 ग्राम और पोटाश 200-250 ग्राम के हिसाब से खाद दें।
- समय-समय पर सूखी और कमजोर टहनियों को काटते रहें।
- कीट और बीमारियों से बचाव के लिए विशेषज्ञों की सलाह पर कीटनाशक का छिड़काव करें।
उत्पादन और आमदनी
ताइवानी अमरूद के पौधे 2-3 साल में फल देना शुरू कर देते हैं और 5-6 साल में पूरी तरह उत्पादन में आ जाते हैं। एक पौधा लगभग 8 साल तक लगातार फल देता है। बाजार में इसकी कीमत देसी अमरूद से कहीं अधिक मिलती है, जिससे किसानों को अच्छी कमाई हो सकती है।
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