नई दिल्ली: भारत के मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव ने एक नई चिंता को जन्म दिया है। कभी सर्दी और गर्मी के बीच संतुलन बनाने वाला बसंत अब धीरे-धीरे छोटा होता नजर आ रहा है। फरवरी के अंत तक गर्मी का अहसास और मार्च में तापमान में तेज बढ़ोतरी इस बदलाव की स्पष्ट झलक दिखा रही है।
मौसम के बदलते स्वरूप के पीछे बड़ी वजहें
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बदलाव के पीछे कई वैज्ञानिक कारण हैं। ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली तेज हवाओं की धारा के रुख में बदलाव से ठंडी हवाओं का असर कम हो रहा है, जिससे सर्दी अचानक खत्म हो जाती है और गर्मी जल्दी शुरू हो जाती है। इस कारण सर्दी और गर्मी के बीच का संतुलन बिगड़ रहा है।
वैश्विक पैटर्न का भी दिख रहा है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर समुद्री तापमान में बदलाव भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है। जब समुद्र के तापमान में उतार-चढ़ाव होता है, तो उसका सीधा असर मौसम पर पड़ता है। इससे कभी अचानक ठंड तो कभी तेज गर्मी देखने को मिलती है, जिससे मौसम अस्थिर हो जाता है।
बसंत सबसे ज्यादा प्रभावित
बसंत को एक संक्रमणकालीन मौसम माना जाता है, जो पूरी तरह संतुलन पर निर्भर करता है। लेकिन अब सर्दियां जल्दी खत्म हो रही हैं और गर्मी जल्दी शुरू हो रही है, जिससे बसंत का समय कम होता जा रहा है। इसका असर न केवल मौसम के अनुभव पर बल्कि कृषि और पर्यावरण पर भी पड़ रहा है।
भविष्य में और बढ़ सकती है समस्या
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह केवल एक साल का बदलाव नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक प्रवृत्ति बनती जा रही है। बढ़ते तापमान और अस्थिर मौसम के कारण आने वाले समय में बसंत और छोटा हो सकता है। इस बदलते मौसम के बीच अब यह साफ संकेत मिल रहा है कि प्रकृति का संतुलन प्रभावित हो रहा है, और इसका असर आने वाले वर्षों में और अधिक गहरा हो सकता है।
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