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पोल्ट्री एक्सपर्ट की खास सलाह: ब्रॉयलर फार्मिंग में लाइट मैनेजमेंट से तय होती है चूजों की ग्रोथ और सेहत

नई दिल्ली: पोल्ट्री फार्मिंग करने वालों के लिए अच्छी खबर है। ब्रॉयलर चूजों की ग्रोथ, सेहत और प्रोडक्शन को बेहतर बनाने में अब तक जिन चीजों पर कम ध्यान दिया जाता रहा है, उनमें से एक है लाइट मैनेजमेंट। पोल्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि मुर्गों के सही विकास में रोशनी और अंधेरे की भूमिका बेहद अहम होती है। खासतौर पर चिकन उत्पादन के लिए पाले जा रहे ब्रॉयलर चूजों को पहले सप्ताह में 24 घंटे की रोशनी देना जरूरी होता है। इसके बाद जैसे-जैसे वे बड़े होते जाते हैं, रोशनी की अवधि को धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों के मुताबिक, फार्म में रोशनी और अंधेरे के समय का सही पालन न होने पर चूजों को तनाव हो सकता है, जिससे उनकी ग्रोथ प्रभावित होती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ती है। यही वजह है कि एक दिन के चूजे से लेकर 40 दिन में तैयार होने वाले ब्रॉयलर के सफर में रोशनी का अनुशासित प्रबंधन बेहद जरूरी है। लाइट मैनेजमेंट सिर्फ ब्रॉयलर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि लेयर फार्मिंग यानी अंडा उत्पादन के लिए पाले जाने वाले चूजों और मुर्गियों पर भी यह लागू होता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस प्रणाली का वैज्ञानिक तरीके से पालन किया जाए तो पोल्ट्री फार्म में उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।

जब फार्म में तय समय पर अंधेरा किया जाता है तो चूजे और मुर्गे आराम करते हैं। इस दौरान उनके शरीर में मेलाटोनिन नामक हार्मोन बनता है, जो न केवल तनाव को कम करता है बल्कि इम्यूनिटी बढ़ाने में भी मदद करता है। अगर फार्म में लगातार रोशनी बनी रहे तो न केवल चूजों की सेहत बिगड़ सकती है, बल्कि उन्हें बीमारियां भी जल्दी पकड़ सकती हैं।

यदि चूजे पहले सात दिनों में कम से कम 150 ग्राम वजन हासिल कर लें, तो उसके बाद रोशनी के घंटों में कटौती शुरू कर देनी चाहिए। रोशनी का समय हर दिन एक जैसा रहना चाहिए। इसमें बदलाव होने पर चूजे चौंक जाते हैं और तनाव में आ जाते हैं। इससे उनका फीड लेने का समय और ग्रोथ चक्र गड़बड़ा सकता है। ऐसे में रोशनी को नियंत्रित करने के लिए टाइमर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। फार्म में ऐसी लाइट का उपयोग करना चाहिए जो बहुत ज्यादा तेज भी न हो और बहुत कम भी नहीं। मीडियम रोशनी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। तेज लाइट से मुर्गे आक्रामक हो सकते हैं, वहीं कम रोशनी उनके खाने की मात्रा को प्रभावित कर सकती है। फार्म में लगाए जाने वाले बल्बों से पूरे परिसर में एकसमान रोशनी मिलनी चाहिए ताकि कहीं छाया या अंधेरे वाली जगह न रहे, जहां चूजे छिप जाएं या फीड लेना बंद कर दें।

अगर फार्म खुली जगह में बना है तो दिन में सूरज की रोशनी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए भी समय और मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है। बंद फार्म में आर्टिफिशियल लाइट का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, लेकिन इस प्रक्रिया में रोशनी और अंधेरा दोनों का संतुलन लाइट मैनेजमेंट गाइडलाइन के अनुरूप होना चाहिए। पोल्ट्री फार्मिंग के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अब जरूरी हो गया है कि वैज्ञानिक तरीकों का पालन करते हुए उत्पादन और लाभ दोनों को सुरक्षित किया जाए। लाइट मैनेजमेंट न केवल चूजों की ग्रोथ को तेजी देता है, बल्कि फार्म की सफलता की दिशा भी तय करता है।

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