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अगस्त में सोयाबीन के भाव मजबूत, कई राज्यों में एमएसपी से ऊपर

Soybean prices firm up in August

नई दिल्ली: अगस्त 2026 के दौरान देश के थोक बाजारों में सोयाबीन की कीमतें मजबूत बनी हुई हैं। कई प्रमुख उत्पादक राज्यों में सोयाबीन के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर कारोबार कर रहे हैं। राज्यवार आंकड़ों के अनुसार अगस्त में देश का औसत थोक भाव 6,867.04 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि जुलाई में यह 6,826.60 रुपये प्रति क्विंटल था। इस तरह मासिक आधार पर कीमतों में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई।

तमिलनाडु में सबसे ऊंचा औसत भाव

अगस्त में सोयाबीन का सबसे अधिक औसत थोक भाव तमिलनाडु में दर्ज किया गया। यहां किसानों और कारोबारियों को औसतन 9,385.12 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिला।

इसके बाद तेलंगाना में 6,888.99 रुपये, कर्नाटक में 6,739.68 रुपये और मध्य प्रदेश में 6,682.72 रुपये प्रति क्विंटल का औसत भाव दर्ज किया गया। प्रमुख उत्पादक राज्यों में कीमतों का यह स्तर सोयाबीन बाजार में मजबूत मांग का संकेत दे रहा है।

छत्तीसगढ़ में एक महीने में 21.8 प्रतिशत तेजी

उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में भी बढ़े भाव

मासिक आधार पर सोयाबीन की कीमतों में सबसे बड़ी तेजी छत्तीसगढ़ में दर्ज की गई। अगस्त में यहां औसत भाव 6,412.89 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जो जुलाई के मुकाबले 21.8 प्रतिशत अधिक है।

उत्तर प्रदेश में सोयाबीन के भाव में 2.6 प्रतिशत और तेलंगाना में 1.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। दूसरी ओर कुछ राज्यों में कीमतों में मामूली गिरावट भी देखने को मिली।

गुजरात में भाव 4.3 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 3.8 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 2.9 प्रतिशत, राजस्थान में 2.4 प्रतिशत, कर्नाटक में 0.9 प्रतिशत और तमिलनाडु में 0.7 प्रतिशत घटे। हालांकि सालाना आधार पर इन राज्यों में भी सोयाबीन की कीमतें काफी मजबूत बनी हुई हैं।

एक साल में तमिलनाडु में दाम दोगुने से ज्यादा बढ़े

छत्तीसगढ़ में भी 53.9 प्रतिशत की सालाना तेजी

सालाना आधार पर सोयाबीन के भाव में प्रमुख राज्यों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तमिलनाडु में सबसे बड़ी 107.8 प्रतिशत की सालाना तेजी रही।

छत्तीसगढ़ में सोयाबीन के भाव 53.9 प्रतिशत, गुजरात में 50.9 प्रतिशत, तेलंगाना में 48 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 47 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 46.8 प्रतिशत बढ़े हैं।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पिछले वर्ष की तुलना में सोयाबीन बाजार में कीमतों का स्तर काफी मजबूत हुआ है। किसानों के लिए यह स्थिति बेहतर बाजार भाव का अवसर दे रही है, हालांकि आगामी फसल के उत्पादन पर बाजार की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

सोयाबीन की मजबूत मांग से बाजार को सहारा

तेल उद्योग की खरीद भी बढ़ा रही कीमत

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सोयाबीन की मजबूत मांग, खाद्य तेल उद्योग की खरीद और आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं के कारण कीमतों को सहारा मिल रहा है। घरेलू बाजार में सोयाबीन की मांग के साथ खाद्य तेल क्षेत्र की जरूरतें भी कीमतों को प्रभावित कर रही हैं।

आने वाले समय में नई फसल की आवक शुरू होने के बाद बाजार की दिशा में बदलाव आ सकता है। उत्पादन के अनुमान, मौसम की स्थिति और वास्तविक आवक यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि सोयाबीन के भाव आगे कितने मजबूत रहते हैं।

मॉनसून की स्थिति पर टिकी बाजार की नजर

कम बारिश से उत्पादन को लेकर चिंता

इस बार मॉनसून की कम बारिश के कारण सोयाबीन की बुवाई प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। बाजार में उत्पादन कम रहने और आने वाले समय में आयात पर निर्भरता बढ़ने की चर्चाओं ने भी कीमतों को मजबूती दी है।

यदि उत्पादन अनुमान कमजोर रहते हैं तो घरेलू बाजार में सोयाबीन की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में कीमतों पर आगे भी तेजी का दबाव बना रह सकता है।

खाद्य तेल बाजार का भी पड़ रहा असर

खाद्य तेलों के आयात में सोयाबीन की हिस्सेदारी बढ़ रही है। पश्चिम एशिया में तनाव के बाद सोयाबीन सहित अन्य खाद्य तेलों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसका असर घरेलू बाजार में सोयाबीन के भाव पर दिखाई दे रहा है।

फिलहाल सोयाबीन बाजार में नरमी के मजबूत संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं। हालांकि नई फसल की आवक, मॉनसून की स्थिति, उत्पादन का वास्तविक आंकड़ा और खाद्य तेलों की अंतरराष्ट्रीय कीमतें आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।

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