नई दिल्ली: देशभर की थोक मंडियों में इन दिनों दलहन, तिलहन और प्याज की कीमतें बेहद गिर गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। ऐसे हालात में केंद्र की एनडीए सरकार ने किसानों को सीधी राहत देने के लिए सोयाबीन, मूंगफली और प्याज सहित कई फसलों की सरकारी खरीद का बड़ा ऐलान किया है। मोदी सरकार की ओर से यह घोषणा मंगलवार को की गई, जिसके तहत दो राज्यों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। कुल मिलाकर 9,700 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की उपज सरकार खरीदने जा रही है।
PSS और MIS के तहत मंजूरी
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ 2025-26 के लिए आंध्र प्रदेश और राजस्थान से आए प्रस्तावों को मंजूरी दी है। सरकार इन फसलों की खरीद मूल्य समर्थन योजना (PSS) और बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) के तहत करेगी। इस बैठक में दोनों राज्यों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
आंध्र प्रदेश में मूंगफली और प्याज की खरीद
केंद्र सरकार द्वारा जारी बयान के अनुसार, आंध्र प्रदेश में 37,273 मीट्रिक टन मूंगफली की खरीद होगी, जबकि राज्य का अनुमानित उत्पादन 1,49,090 मीट्रिक टन है। MSP के आधार पर यह खरीद लगभग 270.71 करोड़ रुपये की होगी। इसके अलावा MIS के तहत 97,887 मीट्रिक टन प्याज की खरीद की जाएगी, जिसकी अनुमानित कीमत 24.47 करोड़ रुपये है। बैठक में राज्य सरकार ने बताया कि रायतु सेवा केंद्रों पर L1 आधार-बायोमेट्रिक सिस्टम लागू कर दिया गया है, जिससे खरीद प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी होगी।
राजस्थान में 4 फसलों की रिकॉर्ड खरीद
राजस्थान के किसानों को इस बार सबसे बड़ी राहत मिलने वाली है। केंद्र ने चार प्रमुख फसलों की सरकारी खरीद को मंजूरी दी है। मूंग 3,05,750 मीट्रिक टन, उड़द 1,68,000 मीट्रिक टन, मूंगफली 5,54,750 मीट्रिक टन और सोयाबीन 2,65,750 मीट्रिक टन की खरीद की स्वीकृति दी गई है। MSP के अनुसार इन फसलों का कुल मूल्य करीब 9,436 करोड़ रुपये बैठता है। केंद्र ने बताया कि राज्य POS आधारित आधार प्रमाणीकरण लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिससे खरीद प्रक्रिया और आसान होगी।
शिवराज सिंह चौहान ने दिए सख्त निर्देश
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने दोनों राज्यों को निर्देश दिया कि खरीद केंद्रों पर पारदर्शिता और सख्त व्यवस्था बनाए रखें। किसानों का पंजीकरण और भुगतान पूरी तरह DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से हो और सभी खरीद केंद्रों पर आधार-सक्षम मशीनें उपलब्ध कराई जाएं। इसके साथ ही FPO और FPC के माध्यम से किसानों को बेहतर और संगठित बाजार उपलब्ध करवाने पर जोर देने की भी सलाह दी गई है।
किसानों के लिए बड़ी राहत
मंडी में गिरते दामों से परेशान किसानों के लिए यह सरकारी खरीद बड़ा सहारा साबित हो सकती है। फसलों के MSP पर खरीद सुनिश्चित होने से तिलहन, दलहन और प्याज उत्पादक किसानों को आर्थिक मजबूती की उम्मीद है। सरकार का यह कदम रबी सीजन की शुरुआत में किसानों की आय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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