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जलवायु बदलाव से निपटने के लिए वैज्ञानिकों की बड़ी कामयाबी, ICAR ने विकसित की धान की नई किस्म DRR धान-100 (कमला)

हैदराबाद: खेती-किसानी के बदलते परिदृश्य और जलवायु की मार को देखते हुए अब कृषि विज्ञान भी तेज़ी से नई दिशा ले रहा है। लगातार बदलते मौसम, कम होती जल उपलब्धता और बढ़ती तापमान की चुनौतियों के बीच अब वैज्ञानिक ऐसी फसलें विकसित करने में जुटे हैं जो कम संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन दे सकें। इसी क्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने धान की एक नई और उन्नत किस्म DRR धान-100 (कमला) विकसित की है, जो आने वाले समय में किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

इस किस्म को हैदराबाद स्थित भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान (IIRR) में वैज्ञानिक डॉ. सत्येंद्र के. मंगरौठिया, डॉ. आर.एम. सुंदरम और उनकी टीम ने विकसित किया है। इसे लोकप्रिय सांबा महसूरी किस्म के जीनोम में विशेष जीन SDN1 की एडिटिंग के माध्यम से तैयार किया गया है। यह किस्म न केवल अधिक उपज देने वाली है बल्कि जलवायु परिवर्तन की प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने में भी सक्षम है।

DRR धान-100 (कमला) कम समय में परिपक्व हो जाने वाली किस्म है। यह पारंपरिक किस्मों की तुलना में लगभग 15 से 20 दिन पहले तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए अधिक समय मिल जाता है। इसके अलावा यह किस्म सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी उपयुक्त मानी जा रही है क्योंकि इसमें मध्यम स्तर की सूखा सहनशीलता पाई गई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस किस्म से धान के उत्पादन में करीब 19 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है, जो किसानों की आमदनी बढ़ाने में मददगार होगी। साथ ही यह किस्म बेहतर अनाज गुणवत्ता देती है, जिससे बाजार में बेहतर मूल्य मिलने की संभावना रहती है।

धान की खेती करने वाले किसानों के लिए यह किस्म एक नया विकल्प बनकर सामने आई है। इसकी बुवाई परंपरागत रोपाई या सीधी बुवाई दोनों विधियों से की जा सकती है। यदि किसान परंपरागत रोपाई करना चाहते हैं, तो उन्हें पहले नर्सरी में पौधे तैयार कर खेत में पानी भरकर रोपाई करनी होगी। वहीं, यदि वे सीधी बुवाई करना चाहें तो गेहूं की तरह हल्की नमी वाले खेत में बीजों की सीधी बुवाई की जा सकती है।

इस किस्म का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह न केवल उत्पादन बढ़ाती है, बल्कि कम पानी और बदलते मौसम में भी अच्छा प्रदर्शन करती है। ऐसे समय में जब खेती लगातार जलवायु संकट से जूझ रही है, DRR धान-100 (कमला) किसानों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर आई है। यह किस्म न केवल वैज्ञानिक उपलब्धि का प्रतीक है, बल्कि टिकाऊ और लाभकारी खेती की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। आने वाले वर्षों में इस किस्म के बड़े पैमाने पर अपनाए जाने की संभावना है, जिससे देश में धान उत्पादन और किसानों की आय दोनों में सुधार हो सकता है।

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