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पंजाब में मक्का खेती योजना, किसानों को प्रति हेक्टेयर मिलेंगे 17500 रुपये

Rs 17500 punjab maize scheme

चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने खेती को पानी बचाने वाली दिशा में आगे बढ़ाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। खरीफ मौसम 2026-27 के लिए मक्का खेती योजना का दायरा बढ़ाते हुए इसे अब 6 जिलों से बढ़ाकर 16 जिलों में लागू किया जाएगा। इसके तहत किसानों को मक्का उगाने के लिए प्रति हेक्टेयर 17500 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, ताकि वे अधिक पानी खपत वाली धान की खेती से हटकर विकल्प अपनाएं। सरकार का मानना है कि इससे न केवल किसानों की आय में सुधार होगा, बल्कि गिरते भूजल स्तर को रोकने में भी मदद मिलेगी।

16 जिलों में लागू होगी योजना

कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियन के अनुसार इस योजना के तहत अमृतसर, बठिंडा, फतेहगढ़ साहिब, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, मोगा, पटियाला, पठानकोट, रूपनगर, संगरूर, एसएएस नगर, एसबीएस नगर और तरनतारन जिलों में कुल 20,000 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ मक्का की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों को प्रति हेक्टेयर 17500 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी, जिसमें से 4,500 रुपये खेती से संबंधित खर्च के बिल जमा करने पर मिलेंगे, जबकि शेष राशि दो किस्तों में जारी की जाएगी।

जियो-टैगिंग और सत्यापन अनिवार्य

योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को पंजीकरण करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्होंने पिछले वर्ष धान की खेती की थी तथा इस वर्ष मक्का की ओर रुख कर रहे हैं। इसके लिए आवश्यक दस्तावेजों के साथ खेत की जियो-टैगिंग और फसल का सत्यापन अनिवार्य किया गया है। पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और सही लाभार्थियों तक सहायता समय पर पहुंचे।

दो चरणों में होगा सत्यापन

सरकार ने सत्यापन प्रक्रिया को दो चरणों में विभाजित किया है। पहला चरण 15 से 25 जुलाई तक और दूसरा चरण 5 से 15 अगस्त 2026 तक चलेगा। प्रत्येक चरण के बाद किसानों को क्रमशः 9,500 रुपये और 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की राशि प्रदान की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि योजना का लाभ वास्तविक और पात्र किसानों तक पहुंचे।

भूजल संरक्षण और किसानों की आय पर जोर

सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे मक्का जैसी कम पानी वाली फसलों को अपनाकर भूजल संरक्षण में सहयोग करें। साथ ही, यह भी कहा गया है कि मक्का के लिए खरीद की सुनिश्चित व्यवस्था की जा रही है, जिससे किसानों को बाजार की चिंता न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि धान-गेहूं फसल चक्र अब टिकाऊ नहीं रह गया है और इस योजना के माध्यम से खेती को अधिक संतुलित और लाभकारी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

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