नई दिल्ली: खरीफ मौसम में हमारे देश के अधिकांश राज्यों में बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है। अच्छी पैदावार के लिए मजबूत और स्वस्थ पौध तैयार करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। मानसून के आगमन के साथ जून और जुलाई में धान की नर्सरी तैयार की जाती है, ताकि समय पर खेतों में रोपाई की जा सके। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में मौसम और वर्षा की स्थिति के अनुसार नर्सरी तैयार करने का समय अलग हो सकता है। कई राज्यों में जुलाई के दौरान भी बड़े पैमाने पर धान की नर्सरी तैयार की जाती है।
इन राज्यों में जुलाई में तैयार होती है धान की नर्सरी
देश के कई प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में जुलाई का महीना नर्सरी तैयार करने और रोपाई शुरू करने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
- उत्तर प्रदेश के पूर्वी और मध्य भागों में जून के अंतिम सप्ताह से लेकर जुलाई के पहले और दूसरे सप्ताह तक धान की नर्सरी तैयार की जाती है। इसके बाद जुलाई में खेतों में रोपाई का कार्य तेजी से शुरू हो जाता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह समय वर्षा की स्थिति के अनुसार कुछ आगे-पीछे हो सकता है।
- बिहार में धान की खेती मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर रहती है। यहां जून के अंत से जुलाई के पहले सप्ताह तक नर्सरी तैयार होती है। पर्याप्त वर्षा होने पर जुलाई के पहले पखवाड़े में रोपाई का कार्य शुरू कर दिया जाता है।
- झारखंड में मानसून सक्रिय होते ही जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई के शुरुआती दिनों में किसान धान की नर्सरी तैयार करते हैं। अधिकांश क्षेत्रों में जुलाई के पहले और दूसरे सप्ताह के दौरान रोपाई पूरी कर ली जाती है।
- पश्चिम बंगाल, जो देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में शामिल है, वहां जून के अंत से लेकर पूरे जुलाई महीने तक बड़े पैमाने पर धान की नर्सरी तैयार की जाती है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में पूरे जुलाई महीने रोपाई का कार्य चलता रहता है।
- छत्तीसगढ़, जिसे धान का कटोरा भी कहा जाता है, वहां जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई तक नर्सरी तैयार की जाती है। जुलाई के दौरान लगभग सभी जिलों में बड़े पैमाने पर धान की रोपाई की जाती है।
अच्छी नर्सरी से मिलती है बेहतर पैदावार
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ और मजबूत नर्सरी ही अच्छी फसल की नींव होती है। यदि पौध मजबूत होगी तो खेत में जल्दी स्थापित होगी, रोगों का खतरा कम रहेगा और उत्पादन बेहतर मिलेगा। सामान्य रूप से 20 से 25 दिन की पौध रोपाई के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
नर्सरी तैयार करते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान
धान की नर्सरी तैयार करते समय हमेशा प्रमाणित और उन्नत किस्म के बीजों का चयन करें। बुवाई से पहले बीजों का उपचार अवश्य करें ताकि शुरुआती रोगों और कीटों से बचाव हो सके। नर्सरी ऐसी जगह तैयार करें जहां अतिरिक्त पानी की निकासी की अच्छी व्यवस्था हो। समय-समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और पौधों की निगरानी करते रहें। यदि किसी प्रकार के कीट या रोग के लक्षण दिखाई दें तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार तुरंत प्रबंधन करें।
समय पर रोपाई से बढ़ता है उत्पादन
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यदि नर्सरी समय पर तैयार हो और सही आयु की पौध की रोपाई की जाए, तो धान की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। इसलिए किसानों को स्थानीय मौसम की स्थिति और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार ही नर्सरी तैयार कर समय पर रोपाई करनी चाहिए। इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।
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