सितंबर शुरू होते ही किसान रबी सीजन की तैयारी में जुट जाते हैं। खासतौर पर सरसों की अगेती किस्मों की बुवाई की तैयारी इस महीने से तेज हो जाती है। सरसों भारत की प्रमुख तिलहन फसल है, जो कम लागत और कम सिंचाई में आसानी से उगाई जा सकती है। इसकी खासियत यह है कि सरसों का तेल हर मौसम में बाजारों में मांग में बना रहता है। यही वजह है कि किसान पारंपरिक फसलों से हटकर बड़े पैमाने पर सरसों की खेती करने लगे हैं। इस बीच किसानों के लिए राहत की बात यह है कि वे अब सरसों की RH-761 किस्म का बीज ऑनलाइन खरीद सकते हैं।
सरसों की यह किस्म हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार द्वारा विकसित की गई है और इसे कम सिंचाई वाले इलाकों के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। हालांकि, सिंचित क्षेत्रों में भी इसकी खेती आसानी से की जा सकती है। RH-761 किस्म पाले के प्रति सहनशील है और इसके दाने सामान्य किस्मों की तुलना में मोटे और गुणवत्तापूर्ण होते हैं। औसतन इसकी पैदावार 25 से 27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है।
किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) ने RH-761 सरसों बीज को ऑनलाइन उपलब्ध कराया है। किसान एनएससी के आधिकारिक ऑनलाइन स्टोर से आसानी से ऑर्डर कर अपने घर पर बीज मंगवा सकते हैं। वर्तमान में 2 किलो का बीज पैकेट लगभग 30% छूट के साथ केवल 280 रुपये में उपलब्ध है। यह ऑफर किसानों को कम लागत में अगेती किस्म अपनाने का बेहतरीन मौका देता है।
खेती के लिहाज से सितंबर से अक्टूबर का मध्य समय सरसों की बुवाई के लिए आदर्श माना जाता है। खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए। बुवाई पंक्तियों में करने पर फसल बेहतर तैयार होती है। इसके लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखनी चाहिए।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सरसों की RH-761 किस्म न केवल उत्पादन में बेहतर है बल्कि किसानों को मुनाफे की गारंटी भी देती है। इसकी खासियत, पैदावार और आसान उपलब्धता इसे किसानों की पहली पसंद बना रही है। अगर किसान अभी से इसकी बुवाई की तैयारी कर लें, तो आने वाले सीजन में अच्छी पैदावार और मुनाफा दोनों हासिल कर सकते हैं।
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