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मध्य प्रदेश में मूंग और उड़द की MSP पर खरीद के लिए पंजीकरण अंतिम चरण में, किसानों से समय पर रजिस्ट्रेशन कराने की अपील

भोपाल: मध्य प्रदेश में इस बार ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी खरीद के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। सरकार और प्रशासन की ओर से किसानों से अपील की गई है कि वे समय रहते रजिस्ट्रेशन कराएं ताकि उन्हें उपज का लाभकारी मूल्य मिल सके। रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख 6 जुलाई तय की गई है, इसके बाद 7 जुलाई से दोनों दलहन फसलों की खरीदी शुरू हो जाएगी, जो 6 अगस्त तक चलेगी। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने इस वर्ष मूंग की खरीदी के लिए 3.51 लाख मीट्रिक टन और उड़द के लिए 1.23 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने बताया कि अब तक मूंग बेचने के लिए 2 लाख 94 हजार से अधिक किसानों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है, वहीं उड़द के लिए 11 हजार 495 किसानों ने आवेदन दिया है। खरीदी के लिए राज्य के 36 जिलों में मूंग और 13 जिलों में उड़द के उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं, जहां फसलों की खरीद की जाएगी।

राज्य सरकार ने खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने के लिए हर केंद्र पर “व्यवस्था उपार्जन समिति” के गठन का भी ऐलान किया है। ये समितियां न केवल पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगी, बल्कि यह सुनिश्चित करेंगी कि किसानों को खरीद के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। रजिस्ट्रेशन के लिए किसानों को आधार कार्ड, राष्ट्रीयकृत बैंक या जिला सहकारी केंद्रीय बैंक का वह खाता नंबर जो आधार से लिंक हो और भू-अधिकार पुस्तिका की स्व-प्रमाणित प्रति जमा करनी होगी। सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे इन दस्तावेजों के साथ निर्धारित तिथि से पहले पंजीकरण जरूर कराएं।

मूंग और उड़द की सरकारी खरीद को लेकर शुरुआत में असमंजस की स्थिति थी। 13 जून को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने केंद्र को खरीद प्रस्ताव भेजने की बात कही थी, लेकिन इससे पहले कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और अधिकारियों के बयान चर्चा में रहे थे। एक बयान में यह तक कहा गया कि राज्य सरकार रासायनिक दवाओं के अधिक उपयोग के चलते ‘जहरीली मूंग’ नहीं खरीदेगी, जिससे किसानों में असंतोष फैल गया। बाद में किसान संगठनों के विरोध और विपक्ष की आलोचना के बाद सरकार ने प्रस्ताव केंद्र को भेजा और उसे मंजूरी भी मिल गई।

अब जब केंद्र और राज्य दोनों ने खरीद प्रक्रिया को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है, तो किसानों को समर्थन मूल्य पर फसल बेचने का रास्ता साफ हो गया है। समय पर रजिस्ट्रेशन और खरीदी के पारदर्शी प्रबंधन से लाखों किसानों को सीधा फायदा मिलेगा और उन्हें अपनी मेहनत का वाजिब दाम भी प्राप्त हो सकेगा। सरकार का दावा है कि पूरी प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाया गया है ताकि किसान बिना किसी परेशानी के अपनी उपज बेच सकें और दलहन उत्पादन को बढ़ावा मिल सके।

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