नई दिल्ली: भारत जैसे बड़े कृषि देश में फसल उत्पादन के बाद भंडारण एक बड़ी चुनौती बना रहता है। अनाज को सुरक्षित रखना किसानों और व्यापारियों के लिए उतना ही जरूरी है जितना उसका उत्पादन। भंडारण के दौरान रेड फ्लोर बीटल जैसे खतरनाक कीट अनाज को भारी नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे खाद्यान्न की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
रेड फ्लोर बीटल से बढ़ रही चुनौती
रेड फ्लोर बीटल एक छोटा लाल-भूरे रंग का कीट है, जो गेहूं, चावल, आटा और दाल जैसे खाद्य पदार्थों में तेजी से फैलता है। इसकी मौजूदगी से अनाज खराब हो जाता है और कई बार उपयोग के लायक भी नहीं रहता। देश और दुनिया में यह कीट भंडारण प्रणाली के लिए एक बड़ी समस्या बन चुका है।
फॉस्फीन गैस हो रही कम असरदार
अनाज को कीटों से बचाने के लिए लंबे समय से फॉस्फीन गैस का उपयोग किया जाता रहा है। लेकिन इसके लगातार इस्तेमाल के कारण अब कई कीटों में इसके प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गई है। इस स्थिति में फॉस्फीन गैस का असर कम हो जाता है और कीट पूरी तरह खत्म नहीं हो पाते, जिससे नुकसान का खतरा और बढ़ जाता है।
वैज्ञानिकों ने खोजा नया समाधान
इस समस्या से निपटने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने एक आधुनिक डीएनए आधारित तकनीक विकसित की है। यह तकनीक यह पहचानने में सक्षम है कि कौन से कीट फॉस्फीन गैस के प्रति प्रतिरोधक हैं। इस नई पद्धति से कुछ ही समय में सटीक जानकारी मिल सकती है, जिससे नियंत्रण के उपाय तुरंत किए जा सकते हैं।
किसानों और भंडारण प्रबंधन को होगा फायदा
इस तकनीक के जरिए समय रहते यह पता लगाया जा सकेगा कि कौन से कीट सामान्य उपचार से नहीं मरेंगे। ऐसे में वैकल्पिक उपाय अपनाकर अनाज को सुरक्षित रखा जा सकेगा। इससे रसायनों का अनावश्यक उपयोग कम होगा और भंडारण लागत में भी कमी आएगी।
पर्यावरण और स्वास्थ्य को भी लाभ
रसायनों का अधिक उपयोग पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए नुकसानदायक होता है। नई तकनीक के उपयोग से केवल जरूरत के अनुसार ही रसायनों का प्रयोग किया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
कृषि क्षेत्र के लिए अहम कदम
यह नई तकनीक कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। इससे न केवल अनाज की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि किसानों की आय में भी सुधार होगा और खाद्यान्न की बर्बादी को कम किया जा सकेगा। रेड फ्लोर बीटल जैसे कीटों की समय पर पहचान और नियंत्रण के लिए विकसित यह तकनीक देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
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