नई दिल्ली: देश में पशुपालन को आय का भरोसेमंद स्रोत मानते हुए बड़ी संख्या में लोग इस क्षेत्र से जुड़ रहे हैं। अनुभवी किसानों के साथ वे लोग भी कदम बढ़ा रहे हैं जिनके पास अभी अनुभव कम है और निवेश सीमित है। ऐसे शुरुआती पशुपालकों के लिए बटेर पालन (क्वेल फार्मिंग) कम लागत, कम जगह और तेज रिटर्न के कारण एक प्रभावी विकल्प बनकर उभरा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि घर या फार्म पर छोटे स्तर से शुरुआत कर के भी बटेर के अंडे और मांस की स्थिर बाजार मांग का लाभ उठाया जा सकता है।
शुरुआत कैसे करें
बटेर पालन की तकनीक पोल्ट्री फार्मिंग की तर्ज पर ही है, इसलिए संचालन समझना अपेक्षाकृत आसान रहता है। साफ-सुथरी और शांत जगह चुनना बुनियादी शर्त है, ताकि पक्षियों पर तनाव न पड़े और उत्पादन प्रभावित न हो। पिंजरे जमीन से थोड़े ऊंचे रखने से सफाई और वेंटिलेशन बेहतर रहता है। 20-25 डिग्री सेल्सियस का नियंत्रित तापमान आदर्श माना जाता है, साथ ही कम से कम 16 घंटे रोशनी देने से पक्षियों की सक्रियता और उत्पादकता बनी रहती है। भोजन और पानी की बर्बादी रोकने के लिए ऑटोमैटिक फीडर और वाटरर उपयोगी हैं।
फीडिंग में संतुलन जरूरी है
एक बटेर को रोजाना औसतन 20–30 ग्राम फीड की आवश्यकता होती है। बाजार में तैयार बटेर फीड उपलब्ध हैं, पर स्वच्छता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि संक्रमण का जोखिम न रहे। नियमित ड्राई-क्लीनिंग, कूड़े का सही निस्तारण और समय-समय पर डिसइन्फेक्शन से बीमारियों की आशंका घटती है।
नस्ल और गुणवत्ता पर फोकस
नए पशुपालकों के लिए भरोसेमंद नर्सरी या मान्य स्रोत से ही चूजे/बीज स्टॉक लेना महत्वपूर्ण है। नस्ल चयन में उद्देश्य स्पष्ट रखें अंडा उत्पादन के लिए जापानी बटेर आमतौर पर लोकप्रिय है, जबकि मांस उत्पादन के लिए ब्रॉयलर बटेर बेहतर मानी जाती है। गुणवत्तापूर्ण स्टॉक से ही फीड-टू-प्रोडक्ट रिटर्न बेहतर मिलता है और शुरुआती निवेश सुरक्षित रहता है।
कम जगह, कम लागत, मांग स्थिर
बटेर आकार में छोटे होते हैं, इसलिए इन्हें पालने के लिए ज्यादा जगह की आवश्यकता नहीं पड़ती। यही वजह है कि छत, बैकयार्ड या सीमित शेड स्पेस में भी यूनिट खड़ी की जा सकती है। संचालन लागत अपेक्षाकृत कम होने से शुरुआती महीनों में ही कैश-फ्लो सुधरने लगता है। बाजार में बटेर के अंडे और मांस की मांग लगातार बनी रहती है और कई क्षेत्रों में इनका भाव परंपरागत मुर्गी उत्पादों से अधिक मिलता है। इससे छोटे पशुपालकों को भी मार्जिन सुरक्षित करने में मदद मिलती है।
क्या रखें खास ध्यान
किसी भी लाइवलिवुड यूनिट की तरह बायोसिक्योरिटी सबसे आगे है आवागमन नियंत्रण, उपकरणों की सफाई, नए स्टॉक का क्वारंटीन और समय पर टीकाकरण और परामर्श से उत्पादन सुरक्षित रहता है। मौसम बदलने पर तापमान-रोशनी का संतुलन, साफ पानी की उपलब्धता और फीड फॉर्म्यूलेशन में सटीकता, पूरे चक्र की उत्पादकता तय करते हैं।
ऐसे में कह सकते हैं कि कम पूंजी, सीमित जगह और सरल संचालन के साथ बटेर पालन नए और छोटे पशुपालकों के लिए व्यावहारिक बिज़नेस मॉडल बन रहा है। साफ-सफाई, सही तापमान-रोशनी, संतुलित फीड और गुणवत्तापूर्ण नस्ल इन चार स्तंभों पर टिके प्रबंधन से अंडे और मांस, दोनों में बेहतर आय की संभावना बनती है। स्थानीय बाजार से तालमेल बिठाकर बिक्री चैनल तय कर लिए जाएं तो बटेर पालन कम जोखिम में स्थिर कमाई का अच्छा अवसर देता है।

