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पंजाब में पराली जलाकर संकट में पड़े किसान

पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि

चंडीगढ़: धान की कटाई के मौसम के साथ ही पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं फिर से बढ़ने लगी हैं। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से अब तक 62 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें सबसे ज्यादा 38 मामले अमृतसर से सामने आए हैं।

अब तक अधिकारियों ने 14 FIR दर्ज की हैं और 15 रेड एंट्री की गई है। पंजाब सरकार ने कुल ₹1,25,000 का जुर्माना लगाया, जिसमें से केवल ₹50,000 ही वसूला जा सका है। सभी FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत दर्ज हुई हैं।

जिलोंवार पराली जलाने के आंकड़े

धान की कटाई और रबी फसल (गेहूं) की बुआई के बीच सीमित समय होने के कारण किसान अक्सर खेतों को जल्दी साफ करने के लिए पराली जलाने को मजबूर हो जाते हैं।

किसानों की नाराज़गी और सुप्रीम कोर्ट का रुख

सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने पर सख्ती दिखाई है, लेकिन किसानों का कहना है कि उन्हें दोषी ठहराना अनुचित है।

कृषि आग की निगरानी और पिछले सालों का रुझान

PPCB ने 15 सितंबर से कृषि आग की घटनाओं को रिकॉर्ड करना शुरू किया है, जो 30 नवंबर तक जारी रहेगा।

पिछले साल के मुकाबले पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन अमृतसर, संगरूर, बठिंडा और मनसा जैसे जिलों में अभी भी मामले ज्यादा हैं।

सियासी संग्राम: कांग्रेस बनाम आप-बीजेपी (H2)

पंजाब में पराली संकट को लेकर सियासत भी गरमा गई है।

पंजाब में पराली जलाने का मुद्दा सिर्फ पर्यावरणीय संकट नहीं है, बल्कि यह किसानों की मजबूरी और राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन चुका है। किसानों का कहना है कि जब तक सरकार ठोस और व्यवहारिक विकल्प उपलब्ध नहीं कराती, तब तक पराली जलाने की समस्या खत्म होना मुश्किल है।

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