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दलहन की खेती पर मिलेगा 10 हजार रुपये, सरकार ने शुरू किया बड़ा मिशन

Pulses Self Reliance Mission

नई दिल्ली: देश को दालों के उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने और विदेशी आयात पर निर्भरता समाप्त करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (2025-31) के तहत देशव्यापी अभियान शुरू किया है। इस मिशन के माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती का प्रशिक्षण देने के साथ प्रति हेक्टेयर 10 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का लक्ष्य नई तकनीकों और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देकर दलहन उत्पादन बढ़ाना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना है।

35 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में बढ़ेगी दलहन खेती

सरकार ने मिशन के तहत दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इसके अंतर्गत धान की कटाई के बाद खाली रहने वाली भूमि और अन्य उपयुक्त क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर लगभग 35 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि पर दलहन की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही अंतरफसल प्रणाली और फसल विविधीकरण को भी प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि किसानों को अधिक लाभ मिल सके और भूमि का बेहतर उपयोग हो।

किसानों को मुफ्त मिलेंगे उन्नत बीज

मिशन का प्रमुख उद्देश्य किसानों तक उच्च गुणवत्ता वाले, अधिक उत्पादन देने वाले और जलवायु के अनुकूल बीज पहुंचाना है। सरकार 126 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों का उत्पादन और वितरण करेगी। इसके अलावा किसानों को 88 लाख उन्नत बीज किट निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। बीजों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक विशेष निगरानी व्यवस्था भी बनाई है, जिससे बीजों की पूरी जानकारी और उनकी गुणवत्ता पर नजर रखी जाएगी।

न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पूरी खरीद का भरोसा

दलहन किसानों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए सरकार ने खरीद व्यवस्था को और मजबूत किया है। योजना के तहत तूर, उड़द और मसूर जैसी प्रमुख दलहन फसलों की पूरी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी। सरकार के अनुसार अगले चार वर्षों तक नामित एजेंसियां किसानों से सीधे खरीद करेंगी, जिससे किसानों को समय पर भुगतान और उचित मूल्य मिलने में सुविधा होगी।

एक हजार प्रसंस्करण इकाइयों की होगी स्थापना

दलहन की फसल की बर्बादी रोकने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के लिए देशभर में एक हजार प्रसंस्करण और पैकेजिंग इकाइयों की स्थापना की जाएगी। प्रत्येक इकाई की स्थापना पर सरकार की ओर से 25 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी। इससे दालों के भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

वर्ष 2030-31 तक तय किए गए बड़े लक्ष्य

सरकार ने आगामी वर्षों के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इसके तहत दलहन खेती का रकबा बढ़ाकर 310 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने, कुल उत्पादन 350 लाख टन करने तथा प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन को बढ़ाकर 1,130 किलोग्राम तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि इस मिशन के सफल क्रियान्वयन से देश में दालों के आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी, मिट्टी की उर्वरता में सुधार आएगा और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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