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नीम से तैयार जैविक घोल का इस्तेमाल कर फसलों को कीटों से बचाएं

Protect crops from pests using neem

नई दिल्ली: नीम का पेड़ भारतीय कृषि परंपरा में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। नीम की पत्तियों, बीजों, बीज की गुठली, खली, टहनियों, छाल और जड़ों का उपयोग खेती में अलग-अलग तरीकों से किया जाता है। नीम से तैयार जैविक घोल का इस्तेमाल कीट प्रबंधन, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, जैविक खाद तैयार करने और अनाज के भंडारण में किया जाता है। नीम के बीजों में पाया जाने वाला एजेडिरैक्टिन कई कीटों की वृद्धि और जीवनचक्र को प्रभावित करता है, जिसके कारण नीम आधारित तैयारियों का उपयोग फसल सुरक्षा में किया जाता है।

खेती में नीम के कई उपयोग

नीम आधारित पदार्थों का उपयोग मुख्य रूप से फसल में कीटों की रोकथाम के लिए किया जाता है। नीम का तेल बीजों से निकाला जाता है और इसमें ऐसे सक्रिय तत्व पाए जाते हैं जो अनेक कीटों के भोजन ग्रहण करने, वृद्धि करने और प्रजनन की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा नीम की खली को खेत की मिट्टी में मिलाने से जैविक पदार्थ बढ़ाने तथा नाइट्रोजन के उपयोग को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।

नीम का तेल कीटों के जीवनचक्र को प्रभावित करता है

नीम के तेल में मौजूद सक्रिय तत्व कीटों की सामान्य जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं। इससे कई कीटों में भोजन ग्रहण करने की क्षमता, वृद्धि, प्रजनन और अंडे देने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसी कारण नीम आधारित पदार्थों का उपयोग फसल में कीटों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। हालांकि इसका प्रभाव कीट की प्रजाति, उसकी अवस्था, घोल की सांद्रता और मौसम जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

नीम की खली से मिट्टी को मिल सकता है लाभ

नीम के बीजों से तेल निकालने के बाद बचा अवशेष नीम की खली कहलाता है। इसे खेत की मिट्टी में मिलाकर जैविक पदार्थ बढ़ाने में सहायता मिल सकती है। नीम की खली मिट्टी में नाइट्रोजन के रूपांतरण की प्रक्रिया को धीमा करती है, जिससे नाइट्रोजन के अनावश्यक नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे पौधों को पोषक तत्वों की उपलब्धता लंबे समय तक बनाए रखने में सहायता मिलती है।

पत्तियों से बनाई जा सकती है खाद

नीम की हरी पत्तियों का उपयोग हरी खाद के रूप में किया जा सकता है। पत्तियों और कोमल टहनियों को खेत में मिलाने पर इनके विघटन के बाद जैविक पदार्थ मिट्टी में जुड़ते हैं। नीम की पत्तियों का उपयोग जैविक खाद और कम्पोस्ट तैयार करने में भी किया जा सकता है। इससे खेत में जैविक पदार्थ बढ़ाने के साथ मिट्टी की संरचना सुधारने में मदद मिल सकती है।

अनाज के भंडारण में भी उपयोगी नीम

नीम की पत्तियों का पारंपरिक रूप से अनाज के भंडारण में भी उपयोग किया जाता रहा है। सूखी नीम की पत्तियों को अनाज के साथ रखने से भंडारित अनाज में कुछ कीटों के प्रकोप को कम करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि लंबे समय तक भंडारण के लिए केवल नीम की पत्तियों पर निर्भर रहने के बजाय उचित सुखाने, साफ-सफाई और सुरक्षित भंडारण व्यवस्था अपनाना जरूरी है।

नीम की पत्तियों और बीजों का अर्क

नीम की पत्तियों और बीजों से तैयार अर्क में कीट नियंत्रण से जुड़े सक्रिय तत्व पाए जाते हैं। इसका उपयोग पत्तियों पर छिड़काव के रूप में किया जा सकता है। कुछ फसलों में बीज उपचार के लिए भी नीम आधारित तैयारियों का उपयोग किया जाता है। धान जैसी फसलों में भी नीम के विभिन्न हिस्सों से तैयार पदार्थों के उपयोग का उल्लेख मिलता है।

नीम की गुठली से तैयार करें कीट नियंत्रण घोल

किसान नीम के बीजों की गुठली से नीम बीज गुठली अर्क तैयार कर सकते हैं। इसे सामान्यतः नीम बीज गुठली अर्क कहा जाता है। इसके लिए एक एकड़ क्षेत्र के लिए लगभग 3 से 5 किलोग्राम नीम की गुठली की आवश्यकता बताई जाती है। ताजे बीजों में लगभग 3 किलोग्राम गुठली पर्याप्त हो सकती है, जबकि पुराने बीजों में लगभग 5 किलोग्राम गुठली की आवश्यकता पड़ सकती है।

गुठली को पानी में रातभर भिगोएं

सबसे पहले नीम के बीजों का बाहरी आवरण हटाकर केवल गुठली अलग कर लें। गुठलियों को हल्के हाथ से कूटकर सूती या मलमल के कपड़े में बांध दें। इसके बाद इस कपड़े की पोटली को लगभग 10 लीटर पानी वाले बर्तन में रातभर भिगोकर रखें। अगले दिन पोटली को अच्छी तरह दबाकर अर्क पानी में निकालें और घोल को छान लें।

छिड़काव के लिए ऐसे तैयार करें घोल

कपड़े में रखी नीम की गुठली को पानी में भिगोने के बाद प्राप्त अर्क को छानना जरूरी है, ताकि छिड़काव करने वाली यंत्र में ठोस कणों के कारण रुकावट न हो। उपलब्ध विधि के अनुसार लगभग 6 से 7 लीटर अर्क प्राप्त किया जा सकता है। इसके बाद जरूरत के अनुसार अर्क को पानी में मिलाकर छिड़काव योग्य घोल तैयार किया जाता है।

साबुन का घोल मिलाने से पत्तियों पर टिकेगा अर्क

छिड़काव से पहले घोल में लगभग 10 मिलीलीटर प्रति लीटर की दर से साबुन का घोल मिलाने की विधि बताई जाती है। इससे नीम का अर्क पत्तियों की सतह पर बेहतर तरीके से फैलने और टिकने में मदद कर सकता है। कीटों के प्रकोप की तीव्रता के अनुसार अर्क की सांद्रता में बदलाव किया जा सकता है, लेकिन फसल और कीट के अनुसार कृषि विशेषज्ञ की अनुशंसा का पालन करना अधिक सुरक्षित है।

नीम के बीजों का सही तरीके से करें भंडारण

नीम से तैयार कीटनाशक घोल की प्रभावशीलता के लिए बीजों की गुणवत्ता महत्वपूर्ण है। फल लगने के मौसम में नीम के फलों को एकत्र करके उन्हें छाया में सुखाया जा सकता है। बीजों को लंबे समय तक रखने से उनमें मौजूद सक्रिय तत्वों की क्षमता कम हो सकती है। इसलिए नीम की गुठली को अधिक समय तक संग्रहित करने के बजाय अपेक्षाकृत ताजा बीजों का उपयोग करना बेहतर माना जाता है।

नौ महीने से पुराने बीजों से बचें

उपलब्ध कृषि विधि के अनुसार नौ महीने से अधिक पुराने नीम के बीजों का उपयोग नीम बीज गुठली अर्क तैयार करने के लिए नहीं करना चाहिए। लंबे समय तक रखे गए बीज अपनी सक्रियता खो सकते हैं, जिससे तैयार अर्क का प्रभाव कम हो सकता है। इसलिए किसान को अच्छी गुणवत्ता वाले और उचित तरीके से रखे गए बीजों का इस्तेमाल करना चाहिए।

शाम के समय करें नीम के घोल का छिड़काव

नीम आधारित घोल का छिड़काव तेज धूप में करने के बजाय शाम के समय करना बेहतर माना जाता है। उपलब्ध विधि में शाम चार बजे के बाद छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इससे घोल के सक्रिय तत्वों पर तेज धूप का प्रभाव कम पड़ सकता है। कीटों की शुरुआती अवस्था में नीम आधारित घोल का उपयोग अधिक प्रभावी हो सकता है।

जरूरत के अनुसार दोहराएं छिड़काव

यदि खेत में कीटों का प्रकोप शुरुआती अवस्था में है तो निश्चित अंतराल पर नीम आधारित घोल का दोबारा छिड़काव किया जा सकता है। लगातार निगरानी करके किसान यह तय कर सकते हैं कि दोबारा छिड़काव की आवश्यकता है या नहीं। अलग-अलग कीट और फसल के लिए छिड़काव की अवधि अलग हो सकती है।

शुरुआती प्रकोप में नीम अधिक उपयोगी

नीम आधारित घोल का उपयोग कीट प्रबंधन में मुख्य रूप से शुरुआती प्रकोप के दौरान अधिक उपयोगी माना जाता है। यदि खेत में कीटों की संख्या बहुत अधिक बढ़ गई है और फसल को गंभीर नुकसान हो रहा है, तो केवल नीम के अर्क पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार अन्य अनुशंसित नियंत्रण उपाय अपनाने की जरूरत पड़ सकती है।

एकीकृत कीट प्रबंधन अपनाना जरूरी

कीट नियंत्रण की लागत कम करने और रासायनिक दवाओं पर निर्भरता घटाने के लिए किसान नीम आधारित तैयारियों को अन्य अनुशंसित उपायों के साथ शामिल कर सकते हैं। फसल की नियमित निगरानी, खेत की स्वच्छता, उचित सिंचाई, संतुलित पोषण और आवश्यकता के अनुसार जैविक तथा रासायनिक नियंत्रण उपायों का समन्वित इस्तेमाल अधिक प्रभावी हो सकता है। किसी भी कीटनाशक का प्रयोग फसल, कीट और अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही करना चाहिए।

नीम आधारित खेती से घट सकती है कीट नियंत्रण की लागत

नीम के पेड़ का उपयोग किसान कई स्तरों पर कर सकते हैं। नीम का तेल, बीज की गुठली, खली, पत्तियां और टहनियां अलग-अलग कृषि कार्यों में उपयोगी हैं। विशेष रूप से नीम बीज गुठली अर्क किसान स्वयं तैयार कर सकते हैं और शुरुआती कीट प्रकोप के समय इसका उपयोग कर सकते हैं। इससे खेती में उपलब्ध स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और कीट नियंत्रण की लागत को कुछ हद तक कम करने में सहायता मिल सकती है।

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