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बिहार में रबी सीजन से फिर शुरू होगी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

Prime Minister's Crop Insurance Scheme will start from the Rabi season.

पटना: करीब सात साल से अधिक समय के बाद बिहार में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को एक बार फिर शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। रबी सीजन 2026-27 से किसानों को इस योजना का लाभ मिलने की संभावना है। योजना को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सहकारिता विभाग की ओर से बैठकों और प्रशिक्षण का दौर शुरू कर दिया गया है। इसी कड़ी में मंगलवार को शास्त्री नगर स्थित दीप नारायण सिंह क्षेत्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान में प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इसमें अधिकारियों और संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधियों को योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और किसानों तक इसके लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

रबी 2026-27 के लिए शुरू हुई तैयारी

प्रशिक्षण कार्यक्रम में रबी 2026-27 के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया के प्रावधानों को समयबद्ध तरीके से लागू करने पर चर्चा हुई। योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए जरूरी प्रक्रियाओं और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को लेकर भी विस्तार से जानकारी दी गई।

समय-सीमा के अनुसार काम पूरा करने पर जोर

अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी जरूरी कार्य पूरे करने और संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। सहकारिता विभाग ने प्रशिक्षण के लिए केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से भी अनुरोध किया था। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा कि योजना शुरू होने के बाद किसानों को बीमा कराने से लेकर फसल क्षति की स्थिति में दावा प्राप्त करने तक किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

फसल खराब होने पर किसानों को मिलेगी आर्थिक सुरक्षा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्राकृतिक आपदा या अन्य निर्धारित कारणों से फसल को नुकसान होने पर पात्र किसानों को आर्थिक सहायता मिलती है। योजना में खरीफ, रबी और वाणिज्यिक तथा बागवानी फसलों के लिए अलग-अलग प्रीमियम निर्धारित किया गया है। खरीफ फसलों के लिए किसान को बीमित राशि का 2 प्रतिशत, रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत और वाणिज्यिक तथा बागवानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम देना होता है। शेष प्रीमियम राशि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से वहन की जाती है।

तकनीक से होगा फसल नुकसान का आकलन

फसल क्षति का आकलन अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें ड्रोन, दूरसंवेदी तकनीक और उपग्रह तस्वीरों की मदद ली जा सकती है। तकनीक के इस्तेमाल से फसल नुकसान की पहचान और आकलन में तेजी आने के साथ दावों के निपटारे की प्रक्रिया को भी अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

कई विभागों की होगी महत्वपूर्ण भूमिका

योजना को सफल बनाने की जिम्मेदारी केवल सहकारिता विभाग तक सीमित नहीं रहेगी। कृषि विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग, वित्त विभाग, अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, बिहार रिमोट सेंसिंग अनुप्रयोग केंद्र, कृषि बीमा कंपनी और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र सहित कई संस्थानों की भूमिका रहेगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में इन विभागों और संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय को योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

किसानों के बीच जागरूकता सबसे बड़ी जरूरत

बिहार में योजना को दोबारा शुरू करने की तैयारी के बीच किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाना भी बड़ी चुनौती होगी। कई किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम से परिचित हैं, लेकिन बीमा कराने की प्रक्रिया, पात्रता, प्रीमियम और फसल नुकसान के बाद दावा लेने के तरीके की पूरी जानकारी उनके पास नहीं है। रबी सीजन से योजना का लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए गांव और पंचायत स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। उनका कहना है कि यदि किसानों को योजना की जानकारी नहीं मिली तो बड़ी संख्या में पात्र किसान इसका लाभ लेने से वंचित रह सकते हैं। इसलिए केवल विभागीय स्तर पर योजना शुरू करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि किसानों तक इसकी जानकारी पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर लगातार प्रयास करना जरूरी है।

सात साल बाद किसानों को फिर मिलेगा बीमा का विकल्प

बिहार में लंबे अंतराल के बाद प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की वापसी किसानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मौसम संबंधी जोखिम, बाढ़, सूखा और अन्य प्राकृतिक कारणों से फसल प्रभावित होने की स्थिति में बीमा किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकता है। हालांकि योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसका क्रियान्वयन कितनी तेजी और पारदर्शिता से होता है। किसानों को समय पर बीमा सुविधा उपलब्ध कराने, नुकसान का सही आकलन करने और दावों का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने के साथ व्यापक जागरूकता अभियान चलाना भी जरूरी होगा।

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