Site icon Agriculture| Kheti| Krishi| Farm| Farmer| Agriculture| News

पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में क्रांति लाने की तैयारी, केंद्र सरकार हाईटेक तकनीकों से बढ़ाएगी दूध उत्पादन और पशुओं की उत्पादकता

Cow shed and farm india.

नई दिल्ली: केंद्र सरकार देश में पशुपालन और डेयरी सेक्टर की तस्वीर बदलने के लिए आधुनिक और उन्नत तकनीकों का सहारा ले रही है। सरकार का लक्ष्य है कि पशुपालकों की आय को दोगुना किया जाए, दूध उत्पादन को बढ़ावा मिले और देश में डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता व मात्रा में जबरदस्त इजाफा हो। इसके लिए पशुपालन और डेयरी विभाग ‘पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (AHIDF)’ के तहत कई नई तकनीकों को प्रोत्साहित कर रहा है। इन हाईटेक तकनीकों में ऑटोमेटेड डेयरी और मीट प्रोसेसिंग यूनिट्स, सेंसर आधारित चारा और जल प्रबंधन प्रणालियां, पर्यावरण नियंत्रित पोल्ट्री फार्म, वैक्सीनेशन तकनीक और एनिमल वेस्ट मैनेजमेंट के लिए बायोडाइजेशन व ऑर्गेनिक खाद उत्पादन तकनीकें शामिल हैं। इन उपायों का मकसद है कि देश के आठ करोड़ छोटे-बड़े पशुपालकों तक वैज्ञानिक पशुपालन की सुविधाएं पहुंचें।

सॉर्टेट सीमन तकनीक से बढ़ेगी बछियों की संख्या

दूध उत्पादन बढ़ाने और दुधारु नस्लों की संख्या में इजाफा करने के लिए केंद्र सरकार सेक्स सॉर्टेट सीमन टेक्नोलॉजी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रही है। अक्टूबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना का शुभारंभ किया था। इस तकनीक से 85-90% मामलों में बछिया के जन्म की संभावना रहती है, जिससे भविष्य में अधिक दूध देने वाली गायों की संख्या बढ़ेगी।

देश में अब तक 125 लाख सेक्स सॉर्टेट सीमन स्ट्रॉ का उत्पादन हो चुका है। पांच सरकारी वीर्य केंद्रों पर यह सेवा दी जा रही है। निजी केंद्रों से उत्पादित सीमन डोज भी कुल आंकड़े में शामिल हैं। पशुपालकों को इसके लिए 50% तक की सब्सिडी मिल रही है। इस तकनीक को स्वदेशी और किफायती बनाया गया है ताकि ग्रामीण इलाकों तक आसानी से पहुंच सके।

IVF तकनीक से सुधारी जा रही हैं देशी नस्लें

देश में पहली बार राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत गोजातीय आईवीएफ तकनीक की शुरुआत की गई है। इससे देशी नस्लों के संरक्षण और सुधार में बड़ी मदद मिल रही है। देशभर में 23 गोजातीय आईवीएफ लैब्स चालू की जा चुकी हैं। अब तक 26,987 भ्रूणों का उत्पादन और 14,993 भ्रूणों का गायों में ट्रांसफर किया जा चुका है। इससे अब तक 2,361 बछड़ों का जन्म हो चुका है। एक सफल आईवीएफ केस पर पशुपालकों को 5,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

यह तकनीक अब गांवगांव तक पहुंचाई जा रही है।

सितंबर 2024 में एनडीडीबी (राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड) और पशुपालन विभाग ने मिलकर IVF तकनीक की शुरुआत की थी। इससे देशी नस्लों को संरक्षित करने और विदेशी नस्लों पर निर्भरता को कम करने में बड़ी मदद मिल रही है।

स्टार्टअप्स को भी मिल रहा है प्रोत्साहन

पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार स्टार्टअप्स को भी विशेष सहयोग दे रही है। फरवरी 2023 में हैदराबाद में एक राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया, जिसमें पशुपालन, डेयरी और पशुधन से जुड़े नए स्टार्टअप्स को अपने विचार और प्रोजेक्ट प्रस्तुत करने का अवसर मिला। इससे क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पशुधन और डेयरी उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार उन्नत टेक्नोलॉजी और योजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र को नया आकार देने में जुटी है। इन प्रयासों से न केवल दूध उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि पशुपालकों की आय में भी इजाफा होगा। साथ ही, गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और जैविक व गुणवत्तापूर्ण डेयरी प्रोडक्ट्स के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

Exit mobile version