नई दिल्ली: देश के पूर्वी हिस्सों में प्री मानसून गतिविधियां तेजी से बढ़ गई हैं। पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार के तराई क्षेत्रों में पिछले 24 घंटों के दौरान मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई है। कोलकाता में अलीपुर और दमदम वेधशालाओं में 54 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई, जबकि झारखंड के चाईबासा में 71 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम एजेंसी स्काइमेट के अनुसार आने वाले एक सप्ताह तक इन क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।
चक्रवाती सिस्टम से बढ़ी बारिश की गतिविधियां
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार दक्षिण-पूर्व उत्तर प्रदेश और आसपास के बिहार क्षेत्र में बने चक्रवाती परिसंचरण के साथ उत्तर-पूर्व बांग्लादेश पर सक्रिय एक अन्य सिस्टम मिलकर प्रभाव डाल रहे हैं। इन दोनों के बीच बनी ट्रफ रेखा बिहार, झारखंड और गंगीय पश्चिम बंगाल से होते हुए पूर्वोत्तर भारत तक फैली हुई है। इसी कारण लगातार बादल बन रहे हैं और वर्षा की गतिविधियां तेज हो रही हैं।
आंधी-तूफान और बिजली गिरने का खतरा
बिहार के तराई इलाकों, झारखंड के आंतरिक हिस्सों और गंगीय पश्चिम बंगाल के दक्षिणी भाग में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना है। पटना, रांची और कोलकाता जैसे शहर भी इसके प्रभाव में रहेंगे। विशेषज्ञों ने बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है। लगातार बारिश के कारण दिन के तापमान में गिरावट दर्ज होगी, जिससे मई के पहले सप्ताह में भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है।
दक्षिण भारत में भी सक्रिय हुआ प्री मानसून
पूर्वी भारत के साथ दक्षिण भारत में भी प्री मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं। बेंगलुरु में हाल ही में 111 मिमी तक वर्षा दर्ज की गई, जिससे सूखे हालात के बाद राहत मिली है। कर्नाटक और तमिलनाडु के ऊपर बनी वायु असंतुलन रेखा और समुद्री नमी के कारण अगले चार से पांच दिनों तक यहां बारिश और आंधी-तूफान जारी रहने की संभावना है। मई की शुरुआत में दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के कई जिलों में तेज बारिश के संकेत हैं।
दिल्ली एनसीआर में भी बदलेगा मौसम
उत्तर भारत में भी मौसम बदलाव की ओर बढ़ रहा है। पश्चिमी विक्षोभ और उससे जुड़े चक्रवाती प्रभाव के कारण दिल्ली एनसीआर में आंधी और बारिश की संभावना बन रही है। दो मई से एक और मजबूत सिस्टम सक्रिय होगा, जिससे चार से छह मई के बीच प्री मानसून गतिविधियां अपने चरम पर पहुंच सकती हैं। इससे तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से राहत मिलेगी।
मानसून को लेकर अनुमान
मौसम एजेंसी के पूर्वानुमान के अनुसार वर्ष 2026 का मानसून सामान्य से थोड़ा कम रह सकता है। जून से सितंबर के बीच कुल वर्षा लगभग 94 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अल नीनो के विकसित होने की संभावना मानसून के दूसरे चरण को प्रभावित कर सकती है, जिससे वर्षा का वितरण असमान हो सकता है। हालांकि पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में इस वर्ष बेहतर वर्षा होने की संभावना जताई गई है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में अगस्त और सितंबर के दौरान सामान्य से कम बारिश हो सकती है।
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