नई दिल्ली: आलू, प्याज और टमाटर भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली सब्जियां मानी जाती हैं। इनका इस्तेमाल लगभग हर घर में रोजाना होता है और बाजार में इनकी कीमतें आमतौर पर बजट फ्रेंडली रहती हैं। हालांकि बीते कई महीनों से फुटकर बाजारों में ये सब्जियां MRP पर महंगी बिक रही हैं, लेकिन इन्हें उगाने वाले किसानों को थोक मंडियों में उपज का उचित दाम नहीं मिल पा रहा। आलू और प्याज के दाम जहां थोक स्तर पर गिरावट दर्ज कर रहे हैं, वहीं टमाटर विपरीत दिशा में महंगा हो गया है, जिससे बाजार और किसानों के समीकरणों में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
आलू और प्याज के दाम में भारी गिरावट
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एगमार्कनेट के आंकड़ों के अनुसार, 18 दिसंबर 2025 तक आलू और प्याज दोनों के थोक दामों में एक साल की अवधि में भारी गिरावट आई है। प्याज का औसत थोक भाव इस समय मात्र 1433 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में प्याज 2179 रुपये प्रति क्विंटल पर बिक रहा था। यानी सालाना आधार पर प्याज के दाम में करीब 34 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। आलू की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। 18 दिसंबर 2025 को आलू का औसत थोक भाव 1001 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि पिछले साल यह भाव 1875 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास था। यानी एक साल में आलू थोक मंडियों में करीब 46 प्रतिशत तक सस्ता हुआ है। ये गिरावट किसानों की लागत मूल्य से भी नीचे चली जा रही है, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है।
प्याज में अल्पकालिक तेजी, आलू में मिश्रित रुझान
थोक बाजार में अल्पकालिक रुझानों की बात करें तो प्याज के दाम पिछले एक हफ्ते में करीब 17 प्रतिशत तक बढ़े हैं। पिछले एक महीने में प्याज के दामों में लगभग 36 प्रतिशत उछाल देखने को मिला है, लेकिन सालाना गिरावट इतनी बड़ी है कि यह बढ़त नुकसान की भरपाई करने में नाकाफी है। वहीं आलू के दामों में मिश्रित रुझान दिखाई दे रहा है। आलू एक हफ्ते में करीब 7 प्रतिशत सस्ता हुआ है, जबकि पिछले महीने में इसमें करीब 30 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह उतार-चढ़ाव मौसम, आवक की मात्रा और मांग के आधार पर तय हो रहा है, लेकिन कीमतें अभी भी पिछले साल के मुकाबले काफी कम हैं।
टमाटर के दाम में 58% की बढ़त, टमाटर ने पकड़ी रफ्तार
आलू और प्याज जहां सस्ते हो रहे हैं, वहीं टमाटर थोक मंडियों में लगातार महंगा होता जा रहा है। 18 दिसंबर 2025 को टमाटर का औसत थोक भाव 3212 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 58 प्रतिशत ज्यादा है। इसकी वजह मौसमी उत्पादन में कमी, कुछ क्षेत्रों में वर्षा की मार और मांग में बढ़ोतरी बताई जा रही है।
किसानों की आय पर दबाव, ट्रांसपोर्ट और लागत ने बढ़ाई परेशानी
किसानों का कहना है कि वे थोक मंडी में पहले से ही कम दाम पर फसल बेच रहे हैं और ऊपर से ट्रांसपोर्टेशन खर्च उनकी आय को और कम कर रहा है। मंडी तक फसल पहुंचाने का ट्रक व किराया खर्च बढ़ने से किसानों के मुनाफे पर गहरा असर पड़ रहा है। कई किसान लागत निकालने के लिए उपज औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं। किसान संगठनों का कहना है कि अगर दाम जल्द न सुधरे, तो किसानों की आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है।
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