कोलकाता: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (पीएम किसान) का इंतजार कर रहे करोड़ों किसानों के लिए आज का दिन बेहद खास है। केंद्र सरकार आज 23वीं किस्त जारी करने जा रही है, जिसके तहत 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में 18,880 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि सीधे भेजी जाएगी। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 20 जून को ‘किसान उत्सव दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के तारकेश्वर से किस्त जारी करेंगे।
शाम चार बजे के बाद खाते में आएंगे पैसे
पीएम किसान के तहत किसानों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन बराबर किस्तों में सीधे बैंक खाते में पहुंचती है। 23वीं किस्त का इंतजार कर रहे किसानों के लिए जानकारी है कि यह राशि आज शाम चार बजे के बाद उनके खातों में पहुंचनी शुरू हो जाएगी।
किस्त से पहले ऐसे जांचें अपनी स्थिति
किसान अपनी किस्त आने से पहले अपनी स्थिति की जांच कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें आधिकारिक पोर्टल पर जाकर “अपनी स्थिति जानें” विकल्प चुनना होगा। वहां पंजीकरण संख्या या मोबाइल नंबर दर्ज करने के बाद पूरी जानकारी सामने आ जाएगी। यहां यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आधार जुड़ा हो, पहचान सत्यापन पूरा हो और सभी दस्तावेज सही हों। यदि सभी के सामने “हाँ” लिखा है, तो किस्त मिलने में कोई समस्या नहीं होगी।
पिछली किस्त कब जारी हुई थी
इससे पहले योजना की 22वीं किस्त 13 मार्च 2026 को असम के गुवाहाटी से जारी की गई थी। आज होने वाले कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री कृषि से जुड़ी अन्य योजनाओं पर भी चर्चा कर सकते हैं।
किन कारणों से रुक सकती है किस्त
कई किसानों की किस्त छोटी-छोटी गलतियों के कारण रुक सकती है। सबसे बड़ा कारण पहचान सत्यापन का अधूरा होना है, जिसे सरकार ने अनिवार्य किया है। इसके अलावा जिन किसानों के बैंक खाते आधार से जुड़े नहीं हैं, उन्हें भी परेशानी हो सकती है। इसलिए किसानों को समय रहते अपनी सभी जानकारी सही कर लेनी चाहिए।
सहायता के लिए संपर्क करें
योजना से जुड़ी किसी भी जानकारी या समस्या के समाधान के लिए किसान सहायता नंबर 011-23381092 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा आधिकारिक ईमेल के माध्यम से भी सहायता प्राप्त की जा सकती है।
क्या है यह योजना
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का उद्देश्य किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। इसके तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की सहायता दी जाती है, ताकि उन्हें खेती से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सके।
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