नई दिल्ली: भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 31 मार्च 2026 को प्लास्टिक कचरे पर नियंत्रण के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम 2026 का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ खेती की जमीन को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाना है। ये नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं और इनके तहत प्लास्टिक के उपयोग, पुनर्चक्रण और निपटान को लेकर सख्त दिशा-निर्देश तय किए गए हैं।
खेती की मिट्टी को बचाने की पहल
खेती में खाद की बोरियों, सिंचाई पाइप और मल्चिंग सामग्री के रूप में प्लास्टिक का व्यापक उपयोग होता है। जब यह प्लास्टिक मिट्टी में मिल जाता है तो यह सूक्ष्म कणों में बदलकर जमीन की उर्वरता को नुकसान पहुंचाता है। नए नियमों के तहत अब प्लास्टिक कचरे के सही निपटान और पुनर्चक्रण को अनिवार्य किया गया है, जिससे खेतों की सेहत को सुरक्षित रखा जा सके।
प्लास्टिक कचरे का होगा सही उपयोग
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्लास्टिक कचरे को अब ऊर्जा उत्पादन, सड़क निर्माण और उद्योगों में उपयोग किया जाएगा। इससे खेतों और गांवों के आसपास जमा होने वाले कचरे में कमी आएगी और मिट्टी के प्रदूषण को रोका जा सकेगा। साथ ही प्लास्टिक अपशिष्ट संसाधकों और पर्यावरण लेखा परीक्षकों की जिम्मेदारी तय की गई है, ताकि नियमों का सही पालन सुनिश्चित हो सके।
कंपनियों पर बढ़ी जिम्मेदारी
नए नियमों के तहत प्लास्टिक बनाने वाली कंपनियों और ब्रांड मालिकों के लिए पुनर्चक्रित प्लास्टिक का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। वर्ष 2025-26 में कठोर प्लास्टिक में 30 प्रतिशत पुनर्चक्रित सामग्री का उपयोग करना जरूरी होगा, जिसे 2028-29 तक बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया जाएगा। इससे बाजार में आने वाली पैकेजिंग अधिक पर्यावरण अनुकूल होगी।
पंचायतों को मिले अधिकार
गांवों में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए ग्राम पंचायतों और जिला पंचायतों को विशेष अधिकार दिए गए हैं। वे अब प्लास्टिक कचरे के संग्रह, प्रबंधन और नियमों के पालन को सुनिश्चित करेंगी। इसके अलावा राज्य स्तर पर निगरानी समितियां बनाई गई हैं, जो इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगी।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को प्लास्टिक सामग्री को जलाने या मिट्टी में दबाने से बचना चाहिए। इसके बजाय उसे दोबारा उपयोग में लाना या सही तरीके से निपटान करना जरूरी है। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी, बल्कि पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। सरकार ने खाद्य सामग्री के संपर्क में आने वाले प्लास्टिक के लिए भी सख्त मानक तय किए हैं, जिससे स्वास्थ्य पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
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