बिहार: जुलाई महीने की शुरुआत के साथ ही खरीफ मौसम की खेती पूरे देश में गति पकड़ने लगती है, लेकिन इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण कई राज्यों में खेती की रफ्तार प्रभावित हुई है। इसके बावजूद बिहार की तस्वीर दूसरे राज्यों से अलग दिखाई दे रही है। राज्य में धान की रोपाई पिछले वर्ष की तुलना में कहीं अधिक तेज गति से आगे बढ़ रही है। 14 जुलाई तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बिहार में लगभग 10 लाख 54 हजार 426 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई हो चुकी है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 28 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक यह आंकड़ा केवल 9.5 प्रतिशत के आसपास था। ऐसे में जहां कई राज्यों में सूखे और अनियमित वर्षा के कारण खेती प्रभावित है, वहीं बिहार में किसानों को अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति का लाभ मिल रहा है।
वर्षा में सुधार से बढ़ी किसानों की उम्मीद
कृषि विभाग के अनुसार, एक जून से 14 जुलाई तक राज्य में सामान्य की तुलना में लगभग 41 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि पिछले वर्ष इसी अवधि में वर्षा की कमी 55 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। इससे स्पष्ट है कि इस बार स्थिति पहले की तुलना में बेहतर बनी हुई है। यदि एक जुलाई से 14 जुलाई के बीच की बात करें तो सामान्य रूप से 160.7 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी, जबकि इस अवधि में लगभग 103.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से लगभग 35.5 प्रतिशत कम है। पिछले वर्ष इसी अवधि में केवल 41.1 मिलीमीटर वर्षा हुई थी, जो सामान्य से लगभग 74.4 प्रतिशत कम थी। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि इस वर्ष वर्षा में सुधार ने खेती को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कुछ दिनों की वर्षा से रोपाई में आई तेजी
जुलाई के पहले सप्ताह तक राज्य में धान की रोपाई कुल लक्ष्य 37 लाख 83 हजार हेक्टेयर के मुकाबले लगभग 12 प्रतिशत ही हो सकी थी। लेकिन पिछले दो से तीन दिनों के दौरान विभिन्न जिलों में हुई वर्षा के बाद रोपाई की रफ्तार बढ़ी और यह आंकड़ा लगभग 16 प्रतिशत आगे बढ़ गया। जिला स्तर पर पश्चिमी चंपारण सबसे आगे दिखाई दे रहा है। यहां 1 लाख 28 हजार 255 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 1 लाख 18 हजार 93 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई पूरी हो चुकी है, जो लगभग 92 प्रतिशत है। दूसरी ओर जमुई जिले की स्थिति सबसे कमजोर बनी हुई है। यहां 69 हजार 501 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले केवल 219 हेक्टेयर क्षेत्र में ही रोपाई हो सकी है, जो एक प्रतिशत से भी कम है।
इन जिलों में सबसे अधिक धान की खेती का लक्ष्य
इस वर्ष बिहार में कुल 37 लाख 83 हजार 946 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है। रोहतास जिले में सबसे अधिक 2 लाख 7 हजार 630 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हालांकि अब तक यहां केवल लगभग 12 हजार 622 हेक्टेयर क्षेत्र में ही रोपाई हो सकी है, जो लगभग 6 प्रतिशत है।
पूर्वी चंपारण में लगभग 1 लाख 88 हजार हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 72 हजार 613 हेक्टेयर क्षेत्र में रोपाई हो चुकी है, जो लगभग 39 प्रतिशत है। गया जिले में 1 लाख 88 हजार 512 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले केवल 1 हजार 11 हेक्टेयर क्षेत्र में रोपाई हुई है। मधुबनी में 1 लाख 66 हजार 533 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 74 हजार 964 हेक्टेयर क्षेत्र में रोपाई पूरी हो चुकी है, जो लगभग 45 प्रतिशत है। वहीं मुजफ्फरपुर जिले में 1 लाख 54 हजार 88 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 53 हजार 520 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई हुई है, जो लगभग 35 प्रतिशत है।
14 जुलाई तक के आंकड़े बताते हैं कि राज्य के कई ऐसे जिले, जहां हर वर्ष बड़े पैमाने पर धान की खेती होती है, वहां अभी भी रोपाई की गति अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा का सिलसिला जारी रहा तो धान की रोपाई में और तेजी आएगी तथा राज्य निर्धारित लक्ष्य के और करीब पहुंच सकेगा।
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