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धान की नर्सरी में यह उपाय अपनाकर कीटों से बचाएं फसल

Paddy Nursery Management

नई दिल्ली: धान की खेती में बेहतर उत्पादन के लिए केवल समय पर रोपाई ही नहीं, बल्कि नर्सरी प्रबंधन भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि धान की नर्सरी के पौधे अधिक लंबे हो जाएं, तो रोपाई से पहले उनके ऊपरी हिस्से का लगभग तीस प्रतिशत भाग काट देना किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है। इससे पौधों पर मौजूद हानिकारक कीटों का प्रकोप मुख्य खेत तक पहुंचने से पहले ही नियंत्रित हो जाता है और पौधे भी अधिक मजबूत बनते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि नर्सरी पच्चीस से तीस दिन से अधिक पुरानी हो जाए और पौधों की लंबाई लगभग एक से डेढ़ फुट तक पहुंच जाए, तो उनके ऊपरी हिस्से की कटाई करने की सलाह दी जाती है। इससे पत्तियों पर मौजूद तना छेदक और पत्ती मोड़क जैसे कीटों के अंडे तथा लार्वा नष्ट हो जाते हैं, जिससे मुख्य फसल को शुरुआती अवस्था में ही सुरक्षा मिल जाती है।

रोपाई से पहले करें यह महत्वपूर्ण काम

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नर्सरी की कटाई हमेशा रोपाई से एक या दो दिन पहले अथवा पौध उखाड़ते समय करनी चाहिए। कटाई के लिए तेज और साफ औजार का उपयोग करना जरूरी है, ताकि पौधों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। इसके अलावा नर्सरी उखाड़ने से एक दिन पहले खेत में पर्याप्त पानी भर देना चाहिए। इससे पौधों की जड़ें सुरक्षित रहती हैं और उन्हें उखाड़ते समय नुकसान की संभावना कम हो जाती है। कटाई के बाद पौधों में नई शाखाएं निकलने की क्षमता बढ़ती है और वे रोपाई के बाद आने वाले तनाव को आसानी से सहन कर लेते हैं।

नर्सरी से ही शुरू हो जाता है कीटों का हमला

विशेषज्ञों के अनुसार तना छेदक और पत्ती मोड़क जैसे कीटों का प्रकोप अक्सर नर्सरी से ही शुरू हो जाता है। जब पौध रोपाई के लिए तैयार होती है, तब इन कीटों के अंडे पौधों के ऊपरी हिस्से पर मौजूद रहते हैं। ऐसी स्थिति में किसानों को पौध की लगभग एक इंच ऊपरी चोटी तोड़कर उसे खेत में छोड़ने के बजाय अलग एकत्रित कर गड्ढे में दबा देना चाहिए। इससे कीटों के अंडे नष्ट हो जाते हैं और उनका फैलाव रुक जाता है।

सुबह और शाम रखें विशेष निगरानी

कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि तना छेदक कीट दिन के समय कम दिखाई देता है। यह प्रायः सुबह जल्दी और शाम के समय अधिक सक्रिय रहता है। इसलिए किसानों को इन्हीं समयों में फसल का निरीक्षण करना चाहिए, ताकि कीटों की समय रहते पहचान कर उनका नियंत्रण किया जा सके।

देसी उपायों से भी किया जा सकता है नियंत्रण

धान की रोपाई के बाद जब पौधे लगभग एक फुट ऊंचे हो जाएं, तब किसान बिना अतिरिक्त खर्च के भी कीट नियंत्रण कर सकते हैं। इसके लिए एक बांस में रस्सी बांधकर पूरे खेत में घुमाया जा सकता है। इससे पौधों पर छिपे कीट नीचे गिर जाते हैं और उनकी संख्या कम हो जाती है। इस प्रक्रिया से पौधों में नई शाखाओं का विकास भी बेहतर होता है।

पत्ती मोड़क कीट से बचाव के आसान तरीके

पत्ती मोड़क कीट पत्तियों को मोड़कर उनके भीतर छिप जाता है और अंदर से रस चूसता रहता है। इस कारण सामान्य दवा का छिड़काव कई बार प्रभावी नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में किसान लगभग दस मीटर लंबी रस्सी की सहायता से खेत में दो लोगों द्वारा उसे आगे-पीछे चला सकते हैं। इसके अलावा नारियल की झाड़ू को डंडे में बांधकर फसल के ऊपर हल्के से फेरने पर भी पत्तियों में छिपे कीट नीचे गिर जाते हैं और पानी में नष्ट हो जाते हैं।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान धान की नर्सरी से ही सावधानी बरतें और समय पर इन सरल उपायों को अपनाएं, तो रासायनिक दवाओं पर होने वाला खर्च कम किया जा सकता है। साथ ही फसल को शुरुआती अवस्था में सुरक्षित रखकर बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

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