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खरीफ बुवाई में धान का दबदबा, दलहन व तिलहन में मामूली या नकारात्मक वृद्धि

नई दिल्ली: देश में खरीफ फसलों की बुवाई इस साल रफ्तार पकड़ चुकी है और केंद्रीय कृषि मंत्रालय के ताज़ा आंकड़े किसानों की मेहनत और मानसून की मेहरबानी दोनों को दर्शाते हैं। मंत्रालय के मुताबिक, 8 अगस्त तक कुल 364.80 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हो चुकी है, जो पिछले साल इसी समय 325.36 लाख हेक्टेयर थी। यानी धान के रकबे में 39 लाख हेक्टेयर से ज्यादा का इजाफा हुआ है। सरकार द्वारा धान की खेती घटाने और दलहन की बुवाई बढ़ाने की अपील के बावजूद किसानों का रुझान अभी भी धान की ओर ही अधिक दिखाई दे रहा है।

दलहन के मोर्चे पर मामूली बढ़त दर्ज हुई है। अब तक 106.68 लाख हेक्टेयर में दालों की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 106.52 लाख हेक्टेयर था। तुअर की बुवाई 40.86 लाख हेक्टेयर में हुई है, लेकिन इसमें पिछले साल के मुकाबले 2.02 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। उड़द 20.15 लाख हेक्टेयर, मूंग 33.21 लाख हेक्टेयर, कुल्थी 0.17 लाख हेक्टेयर और अन्य दालों का रकबा 3.24 लाख हेक्टेयर है। सभी दालों में तुअर ही ऐसी फसल है जिसमें गिरावट दर्ज हुई है।

मॉनसून की अच्छी बरसात से धान की रोपाई में तेजी आई है। यही वजह है कि किसान धान की खेती छोड़ने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। इसके विपरीत, सरकार की प्राथमिकता दलहन उत्पादन बढ़ाने की है, ताकि दालों के आयात पर निर्भरता कम हो सके, लेकिन फिलहाल इस दिशा में बड़े बदलाव के संकेत नहीं मिल रहे।

श्रीअन्न यानी मोटे अनाजों में ज्वार और बाजरा की बुवाई में गिरावट आई है, जबकि रागी और मक्का में मामूली वृद्धि देखी गई है। छोटे मिलेट्स की बुवाई में भी कमी आई है। तिलहन की स्थिति भी उत्साहजनक नहीं है, कुल बुवाई में लगभग 7 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। यह कमी सभी प्रमुख तिलहन फसलों में देखने को मिली है, जिससे तिलहन मिशन के लक्ष्य पर असर पड़ सकता है।

गन्ने की बुवाई में 1.64 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है और अब कुल रकबा 57.31 लाख हेक्टेयर हो गया है। वहीं, जूट की खेती में 0.18 लाख हेक्टेयर और कपास में 3.53 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज हुई है। कुल मिलाकर इस साल खरीफ फसलों का कुल रकबा 995.63 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है, जो पिछले साल से 38.48 लाख हेक्टेयर अधिक है। ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि भले ही कुछ फसलों में कमी है, लेकिन खरीफ सीजन की कुल तस्वीर पिछले साल से बेहतर है। हालांकि, तुअर, तिलहन और कपास जैसी फसलों में आई गिरावट भविष्य के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

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