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श्री विधि धान की खेती: कम लागत, कम पानी में ज्यादा मुनाफा, जानिए कैसे करें खेती

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नई दिल्ली: देशभर में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही धान की खेती जोरों पर है। कई किसान पारंपरिक तरीकों से नर्सरी में तैयार पौध की रोपाई कर रहे हैं, तो कुछ किसान डीएसआर (डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस) तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन कृषि वैज्ञानिक अब एक नई, अत्यधिक लाभकारी तकनीक श्री विधि (SRI – System of Rice Intensification) को अपनाने की सलाह दे रहे हैं, जो कम लागत, कम पानी और अधिक उत्पादन का बेहतर विकल्प बनकर उभरा है।

क्या है श्री विधि?

श्री विधि, जिसे मेडागास्कर विधि भी कहा जाता है, पारंपरिक धान रोपाई की तुलना में एक वैज्ञानिक, आधुनिक और प्रभावशाली तरीका है। इसमें न केवल पानी और बीज की बचत होती है, बल्कि उपज भी कहीं ज्यादा होती है। पारंपरिक पद्धति की तुलना में यह तकनीक किसानों को अधिक मुनाफा देने में सक्षम मानी जा रही है।

श्री विधि क्यों है फायदेमंद?

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, श्री विधि अपनाने से एक हेक्टेयर में केवल 6-8 किलो बीज की जरूरत होती है, जबकि पारंपरिक विधि में 30-40 किलो बीज लगते हैं। इसके अलावा पानी की खपत 40 से 50 प्रतिशत तक कम हो जाती है। उत्पादन की बात करें तो परंपरागत तरीके से जहां प्रति हेक्टेयर 20-25 क्विंटल धान मिलता है, वहीं श्री विधि से यह बढ़कर 35-50 क्विंटल तक पहुंच जाता है।

नर्सरी कैसे तैयार करें?

श्री विधि के तहत नर्सरी तैयार करने के लिए किसानों को भुरभुरी मिट्टी और राख का मिश्रण तैयार करना चाहिए। 10 मीटर लंबी और 5 सेमी ऊंची क्यारी में 50 किलो नाडेप या गोबर की खाद मिलाकर बीजों की बुवाई करनी होती है। बीजों का पहले थाईरम दवा से उपचार करना जरूरी होता है ताकि अंकुरण दर बेहतर हो और रोग से सुरक्षा मिल सके। हर क्यारी में लगभग 120 ग्राम बीज बोएं और उन्हें हल्की मिट्टी से ढककर हल्की सिंचाई करें। 15 से 21 दिन के भीतर पौधे रोपण के लिए तैयार हो जाते हैं।

खेत की तैयारी और पौध रोपण का तरीका

धान के पौधों की रोपाई से पहले खेत की गहरी जुताई करें और खरपतवार पूरी तरह हटा दें। खेत को समतल कर उसमें पर्याप्त नमी बनाए रखें। रोपण के लिए मार्कर हल का उपयोग करें और खेत में 20-20 सेमी की दूरी पर निशान बनाएं। प्रत्येक निशान पर केवल एक पौधा रोपें। पौधों और लाइनों के बीच पर्याप्त दूरी रखने से हवा और नमी का प्रवाह बेहतर रहता है, जिससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और रोग कम लगते हैं।

खरपतवार नियंत्रण और जैविक खाद का इस्तेमाल

श्री विधि से रोपाई में लाइनें साफ और नियमित होती हैं, जिससे खरपतवार को कोनावीडर की मदद से आसानी से हटाया जा सकता है। हटाए गए खरपतवार को खेत में ही मिलाकर जैविक खाद बनाया जा सकता है। इस विधि में रासायनिक खाद की जगह गोबर, नाडेप या वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। धान की रोपाई के 15 दिन बाद जरूरत अनुसार कम मात्रा में यूरिया का छिड़काव किया जा सकता है, लेकिन मिट्टी की पोषण जांच (सॉइल हेल्थ कार्ड) के आधार पर ही खाद डालना बेहतर माना जाता है।

सिंचाई और नमी प्रबंधन

श्री विधि की सबसे बड़ी खासियत यह है कि खेत को हर समय पानी से लबालब रखने की जरूरत नहीं होती। खेत में केवल इतनी सिंचाई करें जिससे मिट्टी में नमी बनी रहे। जब पौधे बढ़ने लगें, तो खेत को 2-3 दिनों के लिए सूखा छोड़ दें और फिर हल्की सिंचाई करें। यह तरीका जड़ों को मजबूत बनाता है और पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है।

किसानों के लिए वरदान बनी श्री विधि

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि श्री विधि पारंपरिक खेती की तुलना में न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि जल संकट के इस दौर में यह बेहद जरूरी समाधान भी है। कम पानी और लागत में अधिक उत्पादन करने वाली यह तकनीक आज किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। आज जब खेती में लागत बढ़ रही है और संसाधनों की कमी हो रही है, ऐसे में श्री विधि जैसी तकनीकें किसानों को नई दिशा दे रही हैं। वैज्ञानिक सोच और सही तकनीक अपनाकर किसान अब कम निवेश में बेहतर उत्पादन कर सकते हैं। खरीफ सीजन में यदि आप धान की खेती कर रहे हैं, तो श्री विधि अपनाकर मुनाफे की नई राह पर चल सकते हैं।

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