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ऑर्गेनिक दूध घी का बढ़ता बाजार: ऊंची कीमत, लेकिन क्या है सच्चाई?

organic milk

नई दिल्ली: खानपान की आदतों में आए बदलाव के साथ अब उपभोक्ता सिर्फ ताजे उत्पाद ही नहीं, बल्कि ऑर्गेनिक होने की भी मांग कर रहे हैं। फल-सब्जियों के बाद अब डेयरी सेक्टर में भी ऑर्गेनिक दूध, घी और दही की मांग तेजी से बढ़ी है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नजर डालें तो ऑर्गेनिक डेयरी प्रोडक्ट बेचने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। लगभग हर विक्रेता अपने दूध को ऑर्गेनिक बताकर ऊंचे दाम पर बेच रहा है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऑर्गेनिक दूध का दावा

असल में दूध को लेकर एक नया बाजार खड़ा हो गया है, जहां दो तरह के दूध की सबसे ज्यादा चर्चा है A2 मिल्क और ऑर्गेनिक दूध। जानकारों के मुताबिक, खासतौर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कई विक्रेता बिना किसी ठोस प्रमाण के दूध को ऑर्गेनिक बताकर बेच रहे हैं। अधिकतर मामलों में यह सिर्फ एक स्व-घोषणा होती है, जिसके पीछे कोई आधिकारिक सर्टिफिकेट मौजूद नहीं होता।

सरकार लाई सर्टिफिकेशन सिस्टम

उपभोक्ताओं को सही जानकारी और भरोसा देने के लिए सरकार ने इस दिशा में अहम कदम उठाया है। राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र (NCONF), नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) और केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने मिलकर ऑर्गेनिक दूध के लिए सर्टिफिकेशन योजना शुरू की है। NCONF के मुताबिक, गाय-भैंस के साथ-साथ बकरी और ऊंट के दूध को भी ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट दिया जाएगा, लेकिन इसके लिए पशुपालकों को तय नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

ऑर्गेनिक का सर्टिफिकेट कैसे मिलता है

डेयरी विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ ऑर्गेनिक हरा चारा खिलाने से दूध ऑर्गेनिक नहीं माना जाता। सर्टिफिकेशन से पहले पूरी उत्पादन प्रक्रिया की जांच होती है। इसमें यह देखा जाता है कि पशुओं को दिया जाने वाला हरा और सूखा चारा पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती से आया हो, ऑर्गेनिक खेतों के आसपास रासायनिक पेस्टीसाइड का इस्तेमाल न हो रहा हो और नियमानुसार दूरी का पालन किया जा रहा हो। इसके साथ ही पशुओं को दी जाने वाली दवाएं, वैक्सीन और फीड भी तय मानकों पर खरी उतरनी चाहिए। फीड में किसी भी तरह के केमिकल या एडिटिव का इस्तेमाल सख्त रूप से प्रतिबंधित है।

कितना समय लगता है?

डेयरी और फीड एक्सपर्ट बताते हैं कि ऑर्गेनिक दूध, घी कोई तुरंत मिलने वाला उत्पाद नहीं है। अगर आज से पशुओं को ऑर्गेनिक चारा देना शुरू किया जाए, तो अगले दिन से दूध ऑर्गेनिक नहीं हो जाता। इसके लिए पशु के प्रकार और उम्र के हिसाब से एक निश्चित समय तय होता है, जिसे पूरा करने के बाद ही दूध को ऑर्गेनिक प्रमाणित किया जाता है।

ग्राहकों के लिए जरूरी सतर्कता

तेजी से बढ़ती मांग के बीच उपभोक्ताओं के लिए यह जरूरी है कि वे ऑर्गेनिक दूध खरीदते समय सिर्फ दावों पर भरोसा न करें। सरकारी सर्टिफिकेट और मान्यता की जांच करना बेहद जरूरी है। आने वाले समय में यह सर्टिफिकेशन व्यवस्था न केवल उपभोक्ताओं को सही उत्पाद दिलाने में मदद करेगी, बल्कि ईमानदार पशुपालकों को भी बेहतर दाम और पहचान दिलाएगी।

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