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नासिक में प्याज व्यापारियों की हड़ताल, सरकार की नीतियों का विरोध

नासिक: महाराष्ट्र के नासिक जिले में प्याज के व्यापारियों ने सरकार द्वारा प्याज पर लिए गए फैसलों के खिलाफ हड़ताल की घोषणा की है। इस हड़ताल के चलते नासिक की मंडियों में प्याज की नीलामी बंद हो गई है। व्यापारियों का कहना है कि सरकार के निर्णयों के कारण उनकी आय कम हो रही है। नासिक से पूरे देश में प्याज की सप्लाई होती है और यहां की मंडी एशिया की सबसे बड़ी है। यहां के व्यापारी अब सरकारी निर्णयों के चलते नुकसान का सामना कर रहे हैं । इस समूचे घटनाक्रम की वजह से देश भर में प्याज की कीमतों में वृद्धि की संभावना बन रही है।

नासिक के प्याज व्यापारी ने सरकार के फैसलों का विरोध करते हुए हड़ताल की घोषणा की है। इन फैसलों के तहत प्याज पर 40% एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई गई है, जिसके चलते नासिक के प्याज व्यापारी नुकसान उठा रहे हैं। उनका कहना है कि नेफेड और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनसीसीएफ) भी इस फैसले के खिलाफ हैं, क्योंकि वे अन्य राज्यों की मंडियों में सस्ते दर पर प्याज खरीदकर नासिक के व्यापारियों और किसानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

इस हड़ताल में नासिक के 15 मुख्य मंडियों में प्याज खरीदने वाले 500 से अधिक व्यापारी शामिल हैं, जिससे मंडियों में कामकाज ठप हो गया है। अगर हड़ताल लंबी चली तो प्याज की कीमतें बढ़ सकती हैं। व्यापारी नेता के अनुसार, इसके चलते प्रति क्विंटल 500-700 रुपये का नुकसान हो रहा है। नासिक जिला प्याज व्यापारी संघ के अध्यक्ष खांडू देवरे ने सरकार से नये निर्णय करने की मांग की है। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि नेफेड और एनसीसीएफ अपने बफर स्टॉक को अन्य राज्यों में एपीएमसी को बेचने की बजाय खुदरा बाजारों में बेचें। हम मार्केट फीस को भी 1 रुपये प्रति क्विंटल से 50 पैसे करना चाहते हैं।”

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