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प्याज कीमतों में भारी गिरावट, किसानों ने मांगी सरकारी दखल

onion prices

मुंबई: पश्चिमी एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब देश के कृषि बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। प्याज की थोक कीमतें गिरकर लगभग 800 रुपये प्रति कुंतल रह गई हैं, जिससे किसानों के लिए अपनी लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। प्याज कीमतों में गिरावट के बीच महाराष्ट्र के प्याज किसानों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

बाजार में गिरावट से बढ़ी किसानों की परेशानी

महाराष्ट्र के नासिक स्थित प्रमुख किसान संगठन ने मुख्यमंत्री से बाजार हस्तक्षेप योजना लागू करने की अपील की है। किसानों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में हालात तेजी से बिगड़े हैं। पहले जहां फरवरी के अंत तक प्याज के दाम 1500 रुपये प्रति कुंतल से अधिक थे, वहीं अब ये घटकर 800 रुपये या उससे भी नीचे पहुंच गए हैं। कुछ मंडियों में तो कीमतें 300 रुपये प्रति कुंतल तक गिर गई हैं।

निर्यात बाधा और युद्ध का दोहरा असर

किसानों के अनुसार पश्चिमी एशिया में युद्ध के चलते बड़ी संख्या में प्याज से भरे कंटेनर विभिन्न बंदरगाहों पर फंस गए हैं। इससे घरेलू बाजार में अचानक आपूर्ति बढ़ गई, जिसके कारण कीमतों में तेज गिरावट आई। इसके अलावा निर्यात नीतियों से जुड़ी परेशानियों ने पहले से ही किसानों की स्थिति कमजोर कर रखी थी। पिछले दो वर्षों में प्याज का निर्यात काफी घट चुका है, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया है।

लागत से कम दाम पर बेचने की मजबूरी

विशेषज्ञों के अनुसार प्याज उत्पादन की लागत 1000 रुपये प्रति कुंतल से अधिक होती है। ऐसे में जब बाजार में कीमतें 800 रुपये या उससे कम हो जाती हैं, तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। यही कारण है कि वर्तमान में कई किसान मजबूरी में कम दाम पर अपनी उपज बेच रहे हैं।

सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

किसान संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत प्याज की खरीद शुरू की जाए, ताकि कीमतों को स्थिर किया जा सके और किसानों को राहत मिल सके। साथ ही तहसील स्तर पर खरीद केंद्र खोलने की भी मांग उठाई गई है।

सरकार कर रही है समाधान पर विचार

राज्य स्तर पर इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि एक समिति बनाकर किसानों की मदद के लिए जल्द से जल्द उपाय सुझाए जाएं। साथ ही केंद्र स्तर पर भी इस विषय को उठाने की तैयारी की जा रही है, ताकि निर्यात से जुड़ी समस्याओं का समाधान निकाला जा सके। प्याज की कीमतों में आई यह भारी गिरावट किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में सरकारी हस्तक्षेप ही इस संकट से उबारने का प्रमुख रास्ता माना जा रहा है।

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