नई दिल्ली: देश में बकरी पालन करने वाले किसान पूरे साल जिस मौके का इंतजार करते हैं, वह बकरीद का महीना होता है। इस दौरान बकरों की मांग इतनी बढ़ जाती है कि बाजारों में हाथों-हाथ ऊंचे दामों पर बिक्री होती है। जानकारों के अनुसार, इस अवधि में करीब ढाई करोड़ से अधिक बकरों की खरीद-फरोख्त होती है, जिससे पालकों को सालभर की कमाई एक ही महीने में मिल जाती है। अगर बकरा कुर्बानी की शर्तों पर खरा उतरता है, तो उसे बाजार में बेहतर कीमत मिलती है।
बकरीद के अलावा देश के कई स्थानीय बाजारों में और कोलकाता में दुर्गा पूजा के अवसर पर भी बकरों की भारी मांग रहती है। इतना ही नहीं, बकरीद से पहले बड़ी संख्या में बकरों का निर्यात भी किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अच्छी नस्ल के बकरों का सही तरीके से पालन किया जाए तो यह व्यवसाय अत्यधिक लाभकारी साबित हो सकता है।
इन चार नस्लों के बकरों की रहती है सबसे ज्यादा मांग
देश में बकरों की कई नस्लें पाई जाती हैं, लेकिन मांस उत्पादन के लिए कुछ विशेष नस्लों की मांग पूरे साल बनी रहती है। इनमें प्रमुख रूप से चार नस्लें शामिल हैं, जिन्हें बकरीद के बाजार में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। बरबरा नस्ल का बकरा आकार में छोटा लेकिन काफी तगड़ा होता है। इसकी ऊंचाई दो से ढाई फुट तक होती है और यह एक साल की उम्र में ही तैयार हो जाता है। उत्तर प्रदेश के आगरा, इटावा, फिरोजाबाद, मथुरा और कानपुर क्षेत्रों में यह नस्ल अधिक पाई जाती है। बाजार में इसकी कीमत दस हजार रुपये से शुरू होती है, जबकि हाल ही में आगरा में इसी नस्ल के तीन बकरों की बिक्री एक लाख साठ हजार रुपये में हुई।
सिरोही नस्ल का बकरा राजस्थान में पाया जाता है और इसका रंग भूरा या काला होता है, जिस पर सफेद धब्बे होते हैं। यह आकार में ऊंचा होता है और बाजार में इसकी कीमत बारह से पंद्रह हजार रुपये तक होती है।
तोतापरी नस्ल के बकरे पतले और लंबे होते हैं, जिनकी ऊंचाई साढ़े तीन से चार फुट तक हो सकती है। यह नस्ल हरियाणा के मेवात और राजस्थान के भरतपुर में पाई जाती है। इसे बाजार के लिए तैयार होने में लगभग तीन साल का समय लगता है और इसकी शुरुआती कीमत बारह से तेरह हजार रुपये होती है।
जमनापारी नस्ल उत्तर प्रदेश के इटावा क्षेत्र में पाई जाती है। यह बकरा लंबा, भारी और आकर्षक होता है, जिसके कान मध्यम आकार के होते हैं और उन पर काले धब्बे पाए जाते हैं। बाजार में इसकी कीमत बारह से बीस हजार रुपये तक होती है।
इन मंडियों से देश-विदेश तक होती है सप्लाई
देश में बकरों की कई बड़ी मंडियां हैं, जहां से न केवल देश के विभिन्न हिस्सों में बल्कि विदेशों में भी सप्लाई की जाती है। उत्तर प्रदेश का जसवंत नगर, कालपी, राजस्थान के महुआ और अलवर तथा हरियाणा का मेवात प्रमुख मंडियों में शामिल हैं। यहां बकरीद के दौरान भारी संख्या में व्यापार होता है और किसान अच्छी कमाई करते हैं। ऐसे में बकरी पालन एक काफी अच्छा व्यवसाय बन जाता है।
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