नई दिल्ली: नवंबर का महीना शुरू होते ही ठंड का असर बढ़ने लगता है और इसका सीधा प्रभाव घरों में लगे तुलसी के पौधों पर भी देखने को मिलता है। ठंडी हवाओं और गिरते तापमान की वजह से तुलसी के पौधों की पत्तियां झड़ने लगती हैं या वे मुरझा जाते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सी सावधानी और सही देखभाल करके तुलसी के पौधों को सालभर हरा-भरा और औषधीय गुणों से भरपूर रखा जा सकता है। नवंबर में तुलसी की खेती को नकारात्मक प्रभावों से बचा कर किसान अपने मुनाफे को बढ़ा सकते हैं।
नवंबर में तुलसी की खेती: पानी और धूप का सही संतुलन ज़रूरी
नवंबर के महीने में तुलसी के पौधों को दिन में सिर्फ 1-2 बार हल्का पानी देना चाहिए। ध्यान रखें कि मिट्टी पूरी तरह सूखी भी न रहे और अधिक गीली भी न हो। इसके लिए गमले के नीचे छेद वाले बर्तन का इस्तेमाल करना बेहतर होता है ताकि अतिरिक्त पानी निकल सके। इस मौसम में तुलसी के पौधों को पर्याप्त धूप दिलाना बेहद जरूरी है। सुबह की हल्की धूप सबसे लाभकारी होती है। कोशिश करें कि तुलसी का पौधा रोजाना कम से कम 4-5 घंटे धूप में रहे।
तुलसी की खेती को खाद और कटाई-छंटाई से मिलेगी ताजगी
नवंबर में तुलसी के पौधों को हल्की मात्रा में जैविक खाद जैसे गोबर की खाद या कंपोस्ट जरूर दें। इससे जड़ें मजबूत होती हैं और पत्तियां लंबे समय तक ताजी रहती हैं। ठंड के मौसम में पौधों की छंटाई करना भी उतना ही जरूरी है। मुरझाई या सूख रही पत्तियों को समय-समय पर हटाते रहें। इससे पौधे में नई पत्तियों का विकास तेजी से होता है और तुलसी का पौधा स्वस्थ बना रहता है।
ठंडी हवाओं से करें सुरक्षा
नवंबर-दिसंबर की ठंडी हवाओं से बचाने के लिए तुलसी के पौधों को घर के अंदर या किसी गर्म स्थान पर रखा जा सकता है। इसके अलावा पौधों को प्लास्टिक शीट या कवर से ढककर भी सुरक्षित किया जा सकता है। अगर तुलसी के पौधों पर कीड़े लगते हैं तो रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करने के बजाय ऑर्गेनिक उपाय अपनाएं। नीम का अर्क, हल्दी का पेस्ट या गोबर से बने घोल का छिड़काव कीट नियंत्रण में मदद करता है। साथ ही प्रभावित पत्तियों को काटकर हटा देना भी पौधे की सेहत बनाए रखने के लिए जरूरी है।
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